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Bollywood Timeless Classic Movie : कोई फिल्म रिलीज हो और डायरेक्टर-प्रोड्यूसर के ऑफिस में पीएमओ से चिट्ठी आ जाए तो सबका हैरत में पड़ जाना लाजिमी है. डायरेक्टर जैसे ही ऑफिस पहुंचे, वहां के कर्मियों ने चिट्ठी के बारे में बताया. पहले तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि पीएमओ से कोई चिट्ठी आई है. खैर उन्होंने हिम्मत जुटाई और चिट्ठी को हाथ में लिया. खोलकर मजबून पढ़ा. चिट्ठी पढ़कर उन्हें खुशी भी हुई और हैरत भी. ये दास्ता ऐसी ही एक कालजयी फिल्म से जुड़ी हुई है. वो फिल्म कौन सी थी, वो प्रोड्यूसर-डायरेक्टर कौन था, पीएमओ ने आखिर चिट्ठी क्यों लिखी थी, आइये जानते हैं रोचक किस्सा……
साल था 1957. भारत को आजाद हुए 10 साल ही हुए थे. इसी दौरान बॉलीवुड में एक मशहूर डायरेक्टर-प्रोड्यूसर बीआर चोपड़ा ने दिलीप कुमार के साथ नए दौर की फिल्म बनाई. इस फिल्म को 15 अगस्त 1957 के दिन रिलीज किया गया. फिल्म दर्शकों को खूब पसंद आई. इसी बीच एक दिन बीआर चोपड़ा जब अपने ऑफिस पहुंचे तो उनके स्टाफ ने बताया कि पीएमओ से चिट्ठी आई. पीएमओ से चिट्ठी की बात सुनकर चोपड़ा ठिठक गए. उन्होंने हिम्मत जुटाई और चिट्टी को पढ़ा. चिट्ठी का मजबून पढ़कर उनके होठों पर मुस्कान तैरनी लगी. चिट्ठी भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने लिखी थी. उन्होंन यह चिट्ठी क्यों लिखी, आइये जानते हैं दिलचस्प किस्सा…..

बीआर चोपड़ा का पूरा नाम बलदेव राज चोपड़ा था. वो मशहूर डायरेक्टर-प्रोड्यूसर यश चोपड़ा के बड़े भाई थी. बॉलीवुड में बतौर डायरेक्टर अपने करियर की शुरुआत 1951 की फिल्म अफसाना से की थी. 1953 में उन्होंने शोले फिल्म का निर्देशन किया. 1955 में उन्होंने अपना बैनर बीआर फिल्म्स बनाया. 1956 में उन्होंने ‘एक ही रास्ता’ नाम से अपनी अगली फिल्म बनाई. फिर उन्होंने मैन वर्सेस मशीन की थीम पर फिल्म बनाने का फैसला लिया. यह आइडिया महात्मा गांधी के एक कोटेशन से आया था. नया दौर उस जमाने में दुनियाभर में हो रहे बदलाव की बात करती है.

बीआर चोपड़ा ने नया दौर फिल्म बनाने की प्रेरणा पर खुलासा करते हुए अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘फिल्म शुरू होते ही इसमें महात्मा गांधी का एक कोटेशन है. औद्योगिकीकरण बहुत जरूरी है मगर यह देखते रहो कि मशीन में कहीं आदमी ना घुस जाए. उसका ध्यान पहले रखना. मशीन और आदमी दोनों को बनाए रखना है. दोनों इकट्ठे रहें.’
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नया दौर एक एवरग्रीन फिल्म थी जिसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता बस महसूस किया जा सकता है. बीआर चोपड़ा ने आगे कहा था, ‘नया दौर फिल्म से जुड़ी एक ऐसी बात है, जिसे जानकर आप सबको खुशी होगी. जिस समय यह फिल्म रिलीज हुई, कुछ दिन मैं अपने ऑफिस गया. मेरे ऑफिस वाले घबराए हुए थे. उन्होंने कहा कि पीएमओ से एक चिट्ठी आई हुई है. मैं भी घबरा गया. मुझे लगा कि मैंने ऐसा तो कुछ किया नहीं है, फिर चिट्ठी क्यों आ गई? मैंने जब चिट्ठी खोली तो उसमें लिखा हुआ था कि डियर चोपड़ा. वो पंडित नेहरू की चिट्ठी थी. मैं समझता हूं कि उस फिल्म के बारे में इससे बेहतर प्रशंसा कुछ नहीं हो सकती.’

चिट्ठी में क्या लिखा था, इस पर रोशनी डालते हुए बीआर चोपड़ा ने आगे बताया, ‘उसमें लिखा हुआ था कि प्रिंस फिलिप हिंदुस्तान आए हुए थे. उन्हें ग्रामीण जिंदगी पर एक फिल्म दिखानी थी. किसी ने कहा कि नया दौर दिखा दीजिए. मैं उन्हें फिल्म दिखाने के लिए ले गया. सोचा था कि 15 मिनट बैठूंगा लेकिन पिक्चर इतनी इंटरेस्टिंग थी कि पूरी फिल्म देख गया. मेरे लिए सबसे बड़ी बात यह थी कि प्राइम मिनिस्टर ने टाइम निकाला और अपने एक कलाकार को हौसला देने के लिए चिट्ठी लिखी.’

नया दौर फिल्म की कहानी-स्क्रीनप्ले अख्तर मिर्जा ने लिखा था. डायलॉग कामिल राशिद ने लिखे थे. फिल्म में दिलीप कुमार और वैजयंती माला लीड रोल में थे. इसके अलावा, अजीत, जीवन, जॉनी वॉकर, चांद उस्मानी, नाजिर हुसैन, मनमोहन कृष्ण, लीला चिटनिस, प्रतिमा देवी और डेजी ईरानी सहायक भूमिकाओं में थीं. म्यूजिक ओपी नैयर का था. गीत साहिर लुधियानवी ने लिखे थे. फिल्म में कुल 9 गाने रखे गए थ. म्यूजिक सुपरहिट था. फिल्म के सुपरहिट गानों में ‘आना है तो आ, राह में देर नहीं है, भगवान के घर देर है अंधेर नहीं है, ये देश है वीर जवानों का, मांग के साथ तुम्हारा, मैंने मांग लिया संसार, उड़े जब-जब जुल्फें तेरी, साथी हाथ बढ़ाना, रेश्मी सलवार कुर्ता जाली का’ जैसे गाने शामिल थे.

दिलीप कुमार ने यह फिल्म दादा मुनि अशोक कुमार के कहने पर की थी. इस फिल्म में 10 दिन तक शूटिंग मधुबाला ने की थी. आउटडोर शूटिंग के लिए भोपाल जाना था तो उन्होंने इनकार कर दिया. बीआर चोपड़ा ने उनकी जगह वैजयंती माला को ले लिया. मधुबाला के पिता अदालत गए. कोर्ट ने बीआर चोपड़ा की फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी. जज को स्क्रिप्ट और कॉन्ट्रैक्ट दिखाया गया जिसमें आउटडोर शूटिंग का भी जिक्र था. पासा पलट गया. मधुबाला कोर्ट में हाजिरी लगाने लगी. उनकी इमेज खराब होने लगी. उधर बीआर चोपड़ा को फायदा हो हुआ. रिलीज से पहले ही फिल्म चर्चा में आ गई. बीआर चोपड़ा की फिल्म रिलीज हुई और बहुत बड़ी हिट हुई. बाद में मधुबाला ने उनके घर जाकर माफी मांगी. ऐसे में बीआर चोपड़ा ने उनके खिलाफ केस वापस ले लिया.

नया दौर के डायरेक्टर-प्रोड्यूसर बीआर चोपड़ा थे. 5वें फिल्म फेयर अवॉर्ड में इस फिल्म को कुल तीन अवॉर्ड मिले थे. बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड दिलीप कुमार को, बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का अवॉर्ड ओपी नैयर को और बेस्ट स्टोरी का अवॉर्ड अख्तर मिर्जा को मिला था. दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के इतने कामयाब होने के बावजूद ओपी नैयर और बीआर चोपड़ा ने फिर कभी साथ में काम नहीं किया. दिलीप कुमार के साथ भी यह ओपी नैयर की इकलौती फिल्म है.

नया दौर 1957 की दूसरी कामयाब फिल्म थी. पहले नंबर पर मदर इंडिया थी. फिल्म के बजट की कोई सही जानकारी नहीं है. फिल्म ने करीब 4 करोड़ का कलेक्शन किया था. 2 करोड़ का नेट कलेक्शन था. फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. नया दौर ने बीआर चोपड़ा को इंडस्ट्री में स्थापित किया. वो टॉप डायरेक्टर-प्रोड्यूसर की लिस्ट में शामिल हो गए. दिलचस्प बात यह है कि बीआर चोपड़ा ने ‘नया दौर’ की कहानी को 1983 में एक बार फिर से पर्दे पर उतारा. ‘मजदूर’ नाम से फिल्म बनाई. यह फिल्म भी उन्होंने दिलीप कुमार को लेकर बनाई लेकिन यह मूवी फ्लॉप रही थी.
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