निःशुल्क विधिक सहायता, अपील अधिकार व स्वास्थ्य सुविधाओं पर दिया गया विशेष जोर
सोनभद्र/एबीएन न्यूज। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश तथा माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सोनभद्र के आदेशानुसार गुरुवार 22 जनवरी 2026 को शैलेन्द्र यादव, अपर जनपद न्यायाधीश एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सोनभद्र द्वारा जिला कारागार, सोनभद्र का निरीक्षण किया गया। इस अवसर पर बंदियों के लिए विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का भी आयोजन किया गया।
निरीक्षण के दौरान जेल अधीक्षक श्री अरुण कुमार मिश्र सहित कारागार के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। निरीक्षण में बताया गया कि जिला कारागार में कुल 773 बंदी निरुद्ध हैं, जिनमें 635 विचाराधीन बंदी तथा 138 सिद्धदोष बंदी शामिल हैं।
निरीक्षण के क्रम में अपर जनपद न्यायाधीश द्वारा सिद्धदोष बंदियों से एक-एक कर संवाद करते हुए उन्हें सजा के विरुद्ध अपील के अधिकारों की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि यदि कोई बंदी निजी अधिवक्ता के माध्यम से अपील करने में असमर्थ है, तो वह जेल अधीक्षक के माध्यम से अपीलीय न्यायालय में अपनी अपील दाखिल करा सकता है। साथ ही जेल अधीक्षक को निर्देशित किया गया कि मानसिक रूप से अस्वस्थ बंदियों की जानकारी नियमानुसार संबंधित न्यायालय को समय से उपलब्ध कराई जाए।
इसके पश्चात बैरकों में जाकर बंदियों से मुलाकात की गई और उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता, सजायाफ्ता बंदियों के लिए अपील के प्रावधान, नियमित पेशी, खान-पान एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। विचाराधीन बंदियों से उनके मुकदमों की प्रगति एवं जमानत की स्थिति के बारे में भी पूछताछ की गई।
मौके पर उपस्थित बंदियों को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बारे में जागरूक करते हुए उनके लाभों की जानकारी दी गई, ताकि वे अपने अधिकारों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें।
निरीक्षण के दौरान कारागार परिसर में स्थित पाकशाला, पाठशाला, नव-निर्मित महिला बैरक, पुरुष बैरक, चिकित्सालय एवं लीगल एड क्लीनिक का भी अवलोकन किया गया। बैरकों में साफ-सफाई, ठंड से बचाव हेतु किए गए इंतजामों तथा स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया गया। बंदियों से उनके स्वास्थ्य के संबंध में भी जानकारी ली गई, हालांकि किसी भी बंदी द्वारा किसी गंभीर समस्या की शिकायत नहीं की गई।
निरीक्षण के दौरान जो भी कमियां सामने आईं, उनके शीघ्र सुधार के लिए जिला कारागार अधीक्षक को आवश्यक निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि बंदियों के अधिकारों की रक्षा, विधिक सहायता की उपलब्धता तथा मानवीय सुविधाएं सुनिश्चित करना विधिक सेवा प्राधिकरण की प्राथमिकता है।
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