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साल 1968 में डायरेक्टर राम माहेश्वरी एक फिल्म लेकर आए थे, फिल्म में मनोज कुमार-राज कुमार जैसे दिग्ग्ज स्टार नजर आए थे. लेकिन फिल्म की हीरोइन के नाम से आज भी ये फिल्म जानी जाती है. फिल्म में लीड रोल में नजर आई वो परमसुंदरी फिल्म का क्रेडिट उस वक्त ले उड़ी थी, जब मनोज और राजकुमार के महज नाम से ही फिल्में हिट हो जाया करती थीं.
नई दिल्ली. साल 1968 में आई वो फिल्म, जिसमें पुनर्जन्म की अनोखी कहानी दिखाई गई थी. फिल्म में लीड रोल में राज कुमार नजर आए थे. मनोज कुमार ने तो इस फिल्म में कैमियो किया था, जबकि मनोज कुमार उस वक्त सुपरस्टार थे. फिर भी फिल्म का सारा क्रेडिट ये परमसुंदरी ले उड़ी थी.

राजकुमार की उस फिल्म का ना है, ‘नील कमल’ फिल्म में लीड रोल में वहीदा रहमान (Waheeda Rehman), राजकुमार (Rajkumar) और मनोज कुमार (Manoj Kumar) नजर आए थे. राजकुमार के साथ वहीदा की जोड़ी को फिल्म में काफी पसंद किया गया था.

जहां फिल्म में वहीदा रहमान ने एक आदर्श पत्नी का रोल निभाया थी, वहीं राजकुमार ने एक ‘मूर्तिकार’ का रोल निभाया था, इसके अलावा मनोज कुमार वहीदा रहमान के पति के रोल में नजर आए थे. फिल्म में राजकुमार के रोल की तो खूब तारीफ हुई थी.
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मनोज कुमार ने जब साल 1968 में की हिट फिल्म ‘नील कमल’ में स्पेशल कैमियो किया तो हर कोई हैरान था कि इतना बड़ा स्टार कैमियो के लिए राजी कैसे हुआ. इसके पीछे की वजह वहीदा रहमान भी थीं. वहीदा रहमान और मनोज कुमार ने साथ कई फिल्मों में काम किया है. फिर दोनों के बीच अच्छी दोस्ती भी रही.

इस दोस्ती के लिए सुपरस्टार होते हुए मनोज ने बड़ी कुर्बानी देते हुए वहीदा के लिए इस फिल्म में कैमियो किया था. डायरेक्टर राम महेश्वरी को फिल्म के लिए एक स्पेशल कैमियो की जरूरत थी,तो वहीदा रहमान ने खुद मनोज कुमार का नाम दिया था और उन्हें काम करने के लिए राजी भी किया था. फिल्म रिलीज हुई तो लोगों ने इसे काफी पसंद किया था, थिएटर तो खचाखच भर गए थे.

फिल्म में भले ही मनोज कुमार का रोल बहुत थोड़ा था,लेकिन जितना था, उन्होंने अपने काम से वहीदा रहमान और राजकुमार को तगड़ी टक्कर दी थी. लेकिन फिर भी फिल्म को आज भी वहीदा के नाम से ही जाना जाता है. इसकी खास वजह है उस फिल्म का एक ब्लॉकबस्टर गाना.

दरअसल, फिल्म में एक विदाई का गाना है बाबुल की दुआए लेती जा. इस गाने को आज भी लोग भूल नहीं पाए हैं. गाने में बलराज साहनी और वहीदा रहमान नजर आई थीं. आज भी वहीदा की वजह से वो गाना और वो फिल्म पहचानी जाती है.

वहीदा और मनोज की बात करें तो दोनों पहले भी फिल्म ‘पत्थर के सनम’ (1967) और ‘राम और श्याम’ (1967) जैसी फिल्मों में अपने काम से लोगों का दिल जीत चुके थे. वहीदा ने फिल्म में जो आदर्श बहू, पत्नी का रोल निभाया वो अमर हो गया और वो फिल्म आज भी उन्हीं के नाम से जानी जाती है.
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