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3 Bollywood Movies with Same Story : कुछ फिल्में अपने समय से बहुत आगे की होती हैं. कई फिल्मों के लिए प्रेरणा का काम करती हैं. 70 के दशक में ऐसी ही एक फिल्म आई थी जिसने दो ब्लॉकबस्टर फिल्मों की बुनियाद रखी. तीनों ही फिल्मों में विलेन का किरदार अमर हो गए. इन फिल्मों को इनके विलेन के नाम से ही जाना जाता है. यह हिंदी सिनेमा की ऐसी फिल्म है, जिसमें विलेन का किरदार करने वाला एक्टर सुपरस्टार बना. अमिताभ बच्चन से भी ज्यादा फीस ली. वो फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं………
बॉलीवुड की कुछ फिल्में के प्लॉट से आइडिया लेकर मिलती-जुलती मूवी बनाई गईं. इन फिल्मों ने इतिहास ही रच दिया. 70 के दशक में ऐसी ही एक फिल्म आई थी जिसका बेसिक आइडिया चुराकर दो फिल्में लिखी गईं. इन दोनों फिल्मों ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए. हम जिस फिल्म की बात कर रहे हैं उसे राज खोसला ने निर्देशित किया था. फिल्म का नाम ‘मेरा गांव मेरा देश’ था’. 13 अगस्त 1971 को रिलीज हुई इस फिल्म का स्क्रीनप्ले जीआर कामत ने लिखा था. कहानी अख्तर रोमानी ने लिखी थी. फिल्म को राज खोसला के भाई लेखराज खोसला और बोलू खोसला ने प्रोड्यूस किया था. धर्मेंद्र, आशा पारेख और विनोद खन्ना लीड रोल में नजर आए थे. इस फिल्म ने बॉलीवुड की दो ब्लॉकबस्टर फिल्मों की बुनियाद रखी.

‘मेरा गांव मेरा देश’ में विनोद खन्ना विलेन के रोल में थे. इस फिल्म ने उनकी किस्मत बदल दी. वो विलेन के रोल छोड़कर हीरो बन गए. इतने बड़े सुपरस्टार बने कि अमिताभ बच्चन के स्टारडम को चुनौती दी. कई फिल्मों में अमिताभ से ज्यादा पैसा लिया. मेरा गांव मेरा देश जब आई तब डकैतों की कहानियां गांव-समाज में रोमांच पैदा कर देती थीं. मेरा गांव मेरा देश का म्यूजिक लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने कंपोज किया था. फिल्म के गाने ‘आया आया अटरिया पे कोई चोर’, ‘कुछ कहता है ये सावन’, ‘मार दिया की छोड़ दिया जाए’ और ‘अपनी प्रेम कहानियां’ बहुत पॉप्युलर हुए थे. आज भी इन गानों की मिठास कानों में मिश्री घोल देती है. गीतकार आनंद बख्शी थे.

‘मेरा गांव मेरा देश’ फिल्म को राज खोसला ने बनाया था. वो सस्पेंस, एक्शन, थ्रिल और सामाजिक फिल्में बनाने के लिए जाने जाते थे. इस फिल्म की सफलता से उत्साहित होकर राज खोसला ने 1973 में ‘कच्चे धागे’ बनाई थी, लेकिन यह फिल्म उतनी नहीं चली थी. सबसे दिलचस्प बात यह है कि ‘मेरा गांव मेरा देश’ फिल्म ने ‘शोले’ और ‘कर्मा’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों की बुनियाद रखी. तीनों फिल्मों का प्लॉट एक जैसा ही है. तीनों फिल्मों में कई समानताएं हैं.
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सलीम-जावेद की जोड़ी ने ‘मेरा गांव मेरा देश’ की कहानी को नए अंदाज में ‘शोले’ में पेश किया. रोचक तथ्य यह है कि अमजद खान के पिता जयंत ने ‘मेरा गांव मेरा देश’ फिल्म में मेजर जसवंत सिंह का किरदार निभाया था. शोले में अमजद खान ने ‘गब्बर सिंह’ डाकू का रोल किया था. ‘मेरा गांव मेरा देश’ में विनोद खन्ना का नाम जब्बर सिंह रहता है, वही शोले फिल्म में अमजद खान का नाम ‘गब्बर सिंह’ रहता है.

‘मेरा गांव मेरा देश’ की शूटिंग राजस्थान के उदयपुर जिले के एक गांव में हुई थी. फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. मेरा गांव मेरा देश और शोले दोनों दोनों ही फिल्मों में धर्मेंद्र ने काम किया है. 15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई आइकॉनिक फिल्म ‘शोले’ में धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, संजीव कुमार, एके हंगल, अमजद खान लीड रोल में थे. ‘मेरा गांव मेरा देश’ में अजित बने धर्मेंद्र जहां सिक्का उछालकर कोई बड़ा फैसला लेते हैं, वहीं ‘शोले’ फिल्म में जय (अमिताभ बच्चन) सिक्का उछालते हैं.

मेरा गांव मेरा देश में धर्मेंद्र, आशा पारेख को बंदूक चलाना सिखाते हैं. शोले फिल्म में भी हमें कुछ इसी तरह का सीन दिखाई देता है जहां धर्मेंद्र, बसंती यानी हेमा मालिनी को बंदूक चलाना सिखाते हैं. मेरा गांव मेरा देश में पौने घंटे बाद ‘जब्बर सिंह’ यानी विनोद खन्ना की एंट्री होती है. वहीं शोले में एक घंटे बाद पर्दे पर गब्बर सिंह यानी अमजद खान की एंट्री होती है. सिनेमा के इतिहास में सबसे ज्यादा टिकट बिकने का वर्ल्ड रिकॉर्ड शोले के नाम है. 1975 में इस फिल्म ने 50 करोड़ का कलेक्शन किया था.

8 अगस्त 1986 में साढ़े तीन करोड़ के बजट में बनी ‘कर्मा’ फिल्म की कहानी का प्लॉट ‘मेरा गांव मेरा देश’ और ‘शोले’ से मिलता-जुलता है. शोले फिल्म में ठाकुर दो कैदियों जय-वीरू की मदद लेकर गब्बर सिंह से बदला लेता है. वहीं, कर्मा में जेलर दिलीप कुमार के परिवार को विलेन डॉ. डैंग के द्वारा खत्म कर दिया जाता है. बाद में दिलीप कुमार तीन कैदियों (अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ और नसीरुद्दीन शाह) की मदद से डॉ. डैंग से बदला लेते हैं. इसी तरह की कहानी ‘मेरा गांव मेरा देश’ में भी देखने को मिलती है.

‘कर्मा’ फिल्म का डायरेक्शन और प्रोडक्शन सुभाष घई ने किया था. सुभाष घई के मन में इस फिल्म को बनाने का आइडिया 1976 में ही आया था. फिर वो दूसरी फिल्मों में बिजी हो गए. ‘मेरी जंग’ बनाने के लिए उन्होंने इस फिल्म की स्क्रिप्ट पर ध्यान दिया. कर्मा फिल्म की दमदार स्टोरी, बेहतरीन डायलॉग और एक्शन सीक्वेंस आज भी लोगों के दिल-दिमाग पर बसे हुए हैं. दिलीप कुमार के अलावा, नूतन, श्रीदेवी, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ, पूनम ढिल्लो, नसीरुद्दीन शाह, अनुपम खेर और दारा सिंह जैसे अभिनेता फिल्म में नजर आए थे. स्टोरी सचिन भौमिक ने लिखी थी. डायलॉग कादर खान ने लिखे थे. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का सदाबहार म्यूजिक था. गीतकार आनंद बक्शी ने इस लोकप्रिय गीत को लिखा था. फिल्म के विलेन डॉक्टर डेंग का किरदार अनुपम खेर ने निभाया था. वो उस समय इंडस्ट्री में न्यू कमर थे. कई डिस्ट्रीब्यूटर्स ने अमरीश पुरी को विलेन के रोल में लेने की सिफारिश की थी लेकिन घई अपनी बात पर अड़े रहे. 20 करोड़ का वर्ल्डवाइड बिजनेस किया था.
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