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मधुर भंडारकर की मशहूर फिल्म ने अपनी रिलीज के 19 साल पूरे कर लिए हैं. साल 2007 में आई इस फिल्म ने मुंबई के सिग्नल पर रहने वाले भिखारियों, बेघरों और छोटे अपराधियों के स्ट्रगल को पर्दे पर उतारा था. फिल्म के लिए मधुर भंडारकर को बेस्ट डायरेक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला. फिल्म में कुणाल खेमू, कोंकणा सेन शर्मा और रणवीर शौरी ने यादगार परफॉर्मेंस दी है. मधुर भंडारकर ने सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर खुशी जाहिर की है. हम ‘ट्रैफिक सिग्नल’ की बात कर रहे हैं.
नई दिल्ली: निर्देशक मधुर भंडारकर के रियलिस्टिक सिनेमा ने दर्शकों पर गहरा असर किया है. 19 साल पहले आई उनकी एक फिल्म ने न सिर्फ ऑडियंस पर गहरा असर डाला, बल्कि नेशनल अवॉर्ड भी अपने नाम किया. हम फिल्म- ‘ट्रैफिक सिग्नल’ की बात कर रहे हैं. साल 2007 में आई फिल्म आज भी मुंबई की सड़कों की कड़वी सच्चाई और सामाजिक गड़बड़ियों को दर्शाने वाली सबसे शानदार फिल्मों में से एक मानी जाती है.
मुंबई के एक ट्रैफिक सिग्नल पर सिमटी फिल्म उन लोगों की जिंदगी को बेनकाब करती है, जिन्हें अक्सर समाज नजरअंदाज कर देता है. इसमें भिखारियों, छोटे अपराधियों और सिग्नल को अपना घर बनाने वालों के जरिये भ्रष्टाचार और गरीबी के गहरे सिस्टम को दिखाया गया है. इस खास मौके पर इमोशनल होते हुए मधुर भंडारकर ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली फिल्म ने उन जिंदगियों पर रोशनी डाली है जिन्हें अनदेखा किया जाता है. 19 साल बाद भी इसका सामाजिक महत्व बरकरार है. मैं पूरी टीम और कलाकारों का आभारी हूं जिन्होंने इस कहानी को जीवंत बनाया.’
यादगार परफॉर्मेंस और स्टार कास्ट
फिल्म में कुणाल खेमू ने ‘सागर’ नाम के लड़के का अहम किरदार निभाया था, जो ट्रैफिक सिग्नल को मैनेज करता है और अनजाने में अपराध की दुनिया में फंस जाता है. उनके साथ फिल्म में कई दिग्गज कलाकार नजर आए थे. कोंकणा सेन शर्मा, रणवीर शौरी, उपेंद्र लिमये, नीतू चंद्रा का भी शानदार रोल है.

(फोटो साभार: Instagram@imbhandarkar)
असरदार सिनेमा
फिल्म ‘ट्रैफिक सिग्नल’ अपनी बेहतरीन कहानी और निर्देशन के दम पर ने 55वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में दो बड़े सम्मान हासिल किए. बेस्ट निर्देशक का खिताब मधुर भंडारकर को मिला, जबकि अनिल पालांडे को बेस्ट मेकअप आर्टिस्ट का खिताब मिला. इससे पहले, मधुर भंडारकर ‘चांदनी बार’ और ‘पेज 3’ जैसी फिल्मों के लिए भी नेशनल लेवल पर सम्मानित हो चुके थे. ‘ट्रैफिक सिग्नल’ ने साबित किया कि मधुर न केवल समाज के निचले तबके की कहानियों को कहने में माहिर हैं, बल्कि उनका सिनेमा इतना असरदार होता है कि वह दशकों तक दर्शकों के जेहन में बना रहता है.
‘ट्रैफिक सिग्नल’ की कहानी
फिल्म में दिखाया गया है कि ‘ट्रैफिक सिग्नल’ के आस-पास बसे हुए लोग गुजर-बसर करते हैं. यहां भिखारी (बच्चे और बड़े), वेश्याएं, दलाल, किन्नर और कपड़े, फूल और गहने बेचने वाले लोग मौजूद रहते हैं. ये लोग तेजी से बोलते हैं, फुर्ती से काम करते हैं और मुंबई की कठोर सड़कों पर किसी तरह गुजारा करने के लिए आपस में कुछ हद तक ईमानदारी बरतते हैं. ये सभी सिग्नल मैनेजर सिलसिला के प्रति वफादार हैं और उन्हें हफ्ता देते हैं.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
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