बीना/सोनभद्र/एबीएन न्यूज। उरमौरा स्थित गायत्री भवन परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। अयोध्या धाम से पधारे कथा व्यास मनीष शरण जी महाराज ने सती चरित्र की कथा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रोताओं को धर्म, मर्यादा और नारी सम्मान का संदेश दिया।
कथा के दौरान महाराज जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में स्त्रियों को जगत पूज्य माना गया है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों में स्त्री के तीन स्वरूप बताए गए हैं—माता, पुत्री और पत्नी। इन तीनों रूपों में स्त्री परिवार और समाज की आधारशिला होती है। उन्होंने कहा कि स्त्री की पूजा तभी तक होती है, जब तक वह अपने आचरण और मर्यादा का पालन करती है, अन्यथा समाज में उसके साथ दुर्व्यवहार होने लगता है।
सती चरित्र का उदाहरण देते हुए कथा व्यास ने बताया कि जब सती ने अपने पिता दक्ष द्वारा भगवान शिव के अपमान को सहन नहीं किया, तो उन्हें अपने ही पिता के यज्ञ में आत्मदाह करना पड़ा। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि सम्मान, आस्था और मर्यादा जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इस अवसर पर मुख्य यजमान वरिष्ठ अधिवक्ता पवन कुमार मिश्र ने अपने परिवार सहित कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण किया। भागवत कथा में आचार्य विनय कुमार शुक्ल, महेश शुक्ल और अरुण तिवारी द्वारा विधिवत पूजन संपन्न कराया गया।
कथा के दौरान विनोद चौबे, दिना नाथ पांडे, विमला मिश्र, करुणाकर द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं और बच्चे उपस्थित रहे। पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
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