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मनोज बाजपेयी की अपकमिंग वेब सीरीज़ ‘घूसखोर पंडत’ के टाइटल को लेकर खूब बवाल कट रहा है. फिल्म का ऐलान होने के बाद से ही ये फिल्म अपने टाइटल को लेकर विवादों में हैं. अब फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की जा रही है. लेकिन ये पहली बार नहीं है, इससे पहले भी कई बार मनोज बाजपेयी की फिल्में रिलीज से पहले विवादों में रह चुकी हैं.
नई दिल्ली. एक्टिंक की दुनिया के सरताज कहे जाने वाले मनोज बाजपेयी की फिल्में जब भी अनाउंस होती हैं, तभी से चर्चा शुरू हो जाती है. वजह सिर्फ उनका नाम नहीं, बल्कि वो कहानियां और किरदार भी होते हैं. इन दिनों वह अपनी अपकमिगं वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर सु्र्खियों में हैं. सीरीज के नाम को लेकर खूब विरोध किया जा रहा.इससे पहले भी मनोज बाजपेयी की कई फिल्में पर रोक की मांग उठाई गई है.

मनोज बाजपेयी अक्सर उन्हीं फिल्मों या सीरीज में नजर आते हैं, जिन्हें छूने से अक्सर मेनस्ट्रीम सिनेमा भी कतराता है. सामाजिक सच्चाई, सिस्टम की सड़ांध, अपराध की दुनिया या फिर बेहद संवेदनशील मुद्दे को उठाते वह अक्सर अपने किरदारों में नजर आते हैं. लेकिन मनोज बाजपेयी की फिल्मों पर अक्सर यही आरोप लगता है कि ये ‘बहुत बोल्ड’, या किसी जाति या व्यक्ति विशेष की छवि को प्रभावित करती है.

यही कारण है कि उनकी कई फिल्में रिलीज से पहले ही विवादों में घिर जाती हैं, लेकिन रिलीज के बाद वही फिल्में दर्शकों और समीक्षकों से जमकर तारीफ भी बटोरती हैं. मनोज बाजपेयी हिंदी सिनेमा की दुनिया में दशकों से भी ज्यादा का समय बिता चुके हैं. उन्होंने अपने करियर में एक से बढ़कर एक फिल्में दी हैं. गैंग्स ऑफ वासेपुर, गुलमोहर, सत्या, शूल ये कुछ ऐसी फिल्में हैं जो कल्ट सिनेमा का उदाहरण हैं.
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अब उनकी अपकमिंग सीरीज ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर भी जमकर विरोध हो रहा है. उनकी इस सीरीज की रिलीज पर रोक लगाने तक की मांग उठ रही है.इससे पहले उनकी फिल्म पिंजर भी खूब विवादों में रही. 2003 में रिलीज हुई फिल्म ‘पिंजर’ भारत-पाकिस्तान बंटवारे और हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक तनाव पर आधारित होने के कारण रिलीज से पहले और बाद में विवादों में रही. फिल्म में बंटवारे के दौरान महिलाओं के अपहरण और पीड़ा को दिखाया गया, जिसे लेकर कड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं.

मनोज बाजपेयी के करियर की सबसे चर्चित और विवादित फिल्मों में एक रही है, ‘बैंडिट क्वीन’. इस फिल्म में उन्होंने डकैत विक्रम मल्लाह का किरदार निभाया था. फिल्म में दिखाए गए यौन उत्पीड़न, हिंसा और गाली-गलौज को लेकर खूब बवाल हुआ था. कई संगठनों ने फिल्म को बैन करने की मांग की थी. हालांकि विवादों के बावजूद यह फिल्म क्रिटिक्स की पसंद बनी और मनोज बाजपेयी को जबरदस्त पहचान दिलाई.

मनोज की फिल्म ‘शूल’ को लेकर भी खूब हंगामा हुआ था. फिल्म में उन्होंने एक ईमानदार और गुस्सैल पुलिस ऑफिसर का रोल निभाया था. फिल्म में सिस्टम, राजनीति और पुलिस के गठजोड़ को बेबाकी से दिखाया गया, जिससे कई राजनीतिक दलों को आपत्ति हुई. कुछ राज्यों में फिल्म को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए. लेकिन दर्शकों ने मनोज के दमदार अभिनय को खूब सराहा और फिल्म को बड़ी सफलता मिली.

अनुराग कश्यप की फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर तो विवादों की लंबी फेहरिस्त लेकर आई थी. मनोज बाजपेयी का ‘सरदार खान’ किरदार अपने डायलॉग्स, गालियों और हिंसक अंदाज की वजह से चर्चा में रहा. कई बार फिल्म पर अश्लील भाषा और अपराध को बढ़ावा देने के आरोप लगे. कुछ जगहों पर सीन हटाने की मांग भी हुई. लेकिन रिलीज के बाद यह फिल्म जबरदस्त हिट साबित हुई और मनोज बाजपेयी के करियर की सबसे आइकॉनिक फिल्मों में शामिल हो गई.

मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘अलीगढ़’ भी रिलीज से पहले भारी विवादों में घिर गई थी. फिल्म का विषय इतना संवेदनशील था कि समाज के एक बड़े वर्ग को यह असहज कर गया. समलैंगिकता जैसे मुद्दे पर खुलकर बात करने वाली इस फिल्म को लेकर कई संगठनों ने विरोध जताया था और इसे भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताया गया. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ लोगों ने भी फिल्म के कंटेंट पर आपत्ति की थी, हालांकि आलोचनाओं के बीच मनोज के अभिनय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली और फिल्म ने कई अवॉर्ड अपने नाम किए.
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