भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुर्सियांग विधायक बिष्णुप्रसाद शर्मा ने रविवार को कहा कि वह आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर नहीं लड़ेंगे। उन्होंने इस फैसले के पीछे पार्टी के केंद्रीय और राज्य नेतृत्व के प्रति गहरी नाराजगी को कारण बताया।
मीडिया से बातचीत में शर्मा ने आरोप लगाया कि पहाड़ी क्षेत्र के लिए भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया, जिससे आम लोगों में निराशा फैली है। उन्होंने कहा कि गोरखालैंड राज्य की मांग से जुड़े स्थायी राजनीतिक समाधान (पीपीएस) को लेकर पार्टी ने 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले किए गए अपने वादे से पीछे हटने का रुख अपनाया।
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पहाड़ी क्षेत्रों के अलग राज्य बनाने की मांग का मुद्दा भूली भाजपा :विधायक
विधायक शर्मा ने आरोप लगाया कि जब भी उन्होंने पहाड़ी क्षेत्र के हितों या अलग राज्य की मांग से जुड़े मुद्दे उठाने की कोशिश की, तो पार्टी के एक वर्ग ने उन्हें दरकिनार किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से भी इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह राजनीति में बने रहेंगे, लेकिन अब भाजपा से कोई संबंध नहीं रखेंगे। खुद को ‘फ्री बर्ड’ बताते हुए शर्मा ने संकेत दिया कि वह किसी क्षेत्रीय या समान विचारधारा वाले राजनीतिक दल के साथ जुड़ने की संभावना से इनकार नहीं करते।
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तृणमूल कांग्रेस ने आंतरिक कलह का लगाया आरोप
इस घटनाक्रम पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भी प्रतिक्रिया दी। सोशल मीडिया मंच एक्स पर टीएमसी ने कहा कि कुर्सियांग विधायक ने भाजपा की राजनीति से तंग आकर पार्टी छोड़ने के संकेत दिए हैं। पार्टी ने भाजपा पर वादों को पूरा करने में विफल रहने और आंतरिक कलह का आरोप लगाया।
टीएमसी ने दावा किया कि चुनाव से पहले भाजपा भीतर से बिखर रही है और जब उसके अपने विधायक ही पार्टी की विचारधारा और कार्यशैली से असंतुष्ट हों, तो जनता का भरोसा पाना उसके लिए मुश्किल होगा।
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