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एक बड़े निर्देशक के बेटे की डेब्यू फिल्म ने रिलीज होते ही कमाल कर दिया. यह म्यूजिकल लव स्टोरी इतनी हिट हुई कि रोमांस की नई मिसाल बन गई. खूबसूरत गाने, ताजगी भरी केमिस्ट्री और दिल को छू लेने वाली कहानी ने दर्शकों को दीवाना बना दिया. नतीजा ये रहा कि फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कई बड़ी फिल्मों को धोबीपछाड़ दे डाला और हीरो रातोंरात स्टार बन गया. जानते हैं ये फिल्म कौन सी है…
नई दिल्ली. फिल्मी दुनिया में स्टारकिड्स की एंट्री नई बात नहीं, लेकिन कुछ डेब्यू ऐसे होते हैं जो इतिहास लिख जाते हैं. एक मशहूर निर्देशक के बेटे की पहली ही फिल्म ने यही कर दिखाया. यह सिर्फ लॉन्च नहीं था, बल्कि रोमांस की परिभाषा बदल देने वाली म्यूजिकल लव स्टोरी बन गई. मधुर गाने, मासूम प्रेम, यादगार लोकेशन और दिल छू लेने वाली केमिस्ट्री वाली इस फिल्म को दर्शकों ने इसे सिर-आंखों पर बिठाया. रिलीज के साथ ही फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसी रफ्तार पकड़ी कि कई बड़ी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया.। इसके गीत आज भी प्यार करने वालों की प्लेलिस्ट में जिंदा हैं और नई पीढ़ी भी उसी शिद्दत से सुनती है.इस फिल्म ने न सिर्फ अपने हीरो को रातोंरात स्टार बनाया, बल्कि यह साबित कर दिया कि जब कहानी में सच्चा इमोशन हो तो जादू अपने आप चल जाता है. कौन सी है ये फिल्म? नाम जानकर चौंक जाएंगे.

बॉलीवुड की दुनिया में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जो सिर्फ मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी की सोच को बदल देती हैं. ऐसी ही एक फिल्म है ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ यानी डीडीएलजे. ये फिल्म 20 अक्टूबर 1995 को रिलीज हुई थी. यह फिल्म न केवल बॉलीवुड की सबसे सफल रोमांटिक फिल्मों में से एक है, बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई है. फोटो साभार-@IMDb

शाहरुख खान और काजोल की जोड़ी ने राज और सिमरन के किरदारों से लाखों दिलों को जीता और फिल्म के डायलॉग्स आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं. जैसे ‘जा सिमरन जा, जी ले अपनी जिंदगी’ या ‘पलट’. फिल्म ने पारिवारिक मूल्यों, प्रेम और परंपराओं के बीच संतुलन को इतनी खूबसूरती से दिखाया कि यह आज भी प्रासंगिक लगती है.
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शाहरुख खान और काजोल की जोड़ी ने राज और सिमरन के किरदारों से लाखों दिलों को जीता और फिल्म के डायलॉग्स आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं. जैसे ‘जा सिमरन जा, जी ले अपनी जिंदगी’ या ‘पलट’. फिल्म ने पारिवारिक मूल्यों, प्रेम और परंपराओं के बीच संतुलन को इतनी खूबसूरती से दिखाया कि यह आज भी प्रासंगिक लगती है.

इस फिल्म के साथ आदित्य चोपड़ा का यह डायरेक्टोरियल डेब्यू हुआ और उनके पिता यश चोपड़ा ने इसे प्रोड्यूस किया. फिल्म की शूटिंग भारत, लंदन और स्विट्जरलैंड में सितंबर 1994 से अगस्त 1995 तक चली. संगीत जतिन-ललित ने दिया और गाने जैसे ‘तुझे देखा तो ये जाना सनम’, ‘मेहंदी लगा के रखना’ और ‘रुक जा ओ दिल दीवाने’ आज भी हिट हैं. फिल्म की लंबाई 189 मिनट है और यह हिंदी भाषा में है. फोटो साभार-@IMDb

फिल्म की कहानी दो एनआरआई युवाओं राज मल्होत्रा (शाहरुख खान) और सिमरन सिंह (काजोल) के इर्द-गिर्द घूमती है. राज एक अमीर घराने का बिंदास लड़का है, जबकि सिमरन एक पारंपरिक पंजाबी परिवार की बेटी है, जिसकी शादी उसके पिता (अमरीश पुरी) ने पहले से तय कर रखी है. यूरोप की यात्रा के दौरान दोनों में प्यार हो जाता है, लेकिन सिमरन के पिता की सख्ती के आगे राज को साबित करना पड़ता है कि वह दुल्हनिया को दिल से ले जाएगा. फिल्म में फरीदा जलाल, अनुपम खेर, सतीश शाह, हिमानी शिवपुरी, परमीत सेठी और मंदिरा बेदी जैसे कलाकारों ने सहायक भूमिकाएं निभाईं. फोटो साभार-@IMDb

इस फिल्म लिए शाहरुख खान ‘राज’ के रोल के लिए पहली पसंद नहीं थे. आदित्य चोपड़ा ने पहले टॉम क्रूज जैसे हॉलीवुड स्टार को सोचा था फिर सैफ अली खान और आमिर खान को ऑफर किया गया, लेकिन शाहरुख ने इसे स्वीकार किया. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म के हिट गाने ‘रुक जा ओ दिल दीवाने’ गाने में जब शाहरुख काजोल को गिराते हैं तो काजोल को पहले से नहीं बताया गया था, ताकि उनका रिएक्शन असली हो. फोटो साभार-@IMDb

फिल्म का बजट महज 4 करोड़ रुपये था, जो उस समय के हिसाब से एक सामान्य राशि थी. लेकिन इसने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया. भारत में फिल्म ने 89 करोड़ रुपये की कमाई की, जबकि ओवरसीज में 13.5 करोड़ रुपये कमाए. कुल मिलाकर 102.5 करोड़ रुपये की ग्रॉस कमाई के साथ यह 1995 की सबसे ज्यादा कमाने वाली भारतीय फिल्म बनी. आज के हिसाब से फिल्म की कमाई भारत में 970 करोड़ और कुल 1115 करोड़ रुपये के बराबर है. मुंबई के मराठा मंदिर थिएटर में यह फिल्म 25 साल से ज्यादा समय तक लगातार चली, जो भारतीय सिनेमा का रिकॉर्ड है. फोटो साभार-@IMDb

डीडीएलजे ने अवॉर्ड्स की दुनिया में भी धमाल मचाया. 1996 के फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में इसने 10 अवॉर्ड्स जीते, जो उस समय किसी एक फिल्म के लिए रिकॉर्ड था. इनमें बेस्ट फिल्म, बेस्ट डायरेक्टर (आदित्य चोपड़ा), बेस्ट एक्टर (शाहरुख खान), बेस्ट एक्ट्रेस (काजोल), बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस (फरीदा जलाल), बेस्ट कॉमिक एक्टर (अनुपम खेर), बेस्ट प्लेबैक सिंगर मेल (उदित नारायण), बेस्ट स्क्रीनप्ले, बेस्ट डायलॉग और बेस्ट लिरिसिस्ट (आनंद बख्शी) शामिल हैं. इसके अलावा, इसे नेशनल फिल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट पॉपुलर फिल्म प्रोवाइडिंग होलसम एंटरटेनमेंट भी मिला. फिल्म को कुल 15 अवॉर्ड्स और 4 नॉमिनेशन्स मिले. 2020 में इसके 25 साल पूरे होने पर लंदन के लीसेस्टर स्क्वायर में शाहरुख और काजोल की ब्रॉन्ज स्टैच्यू लगाई गई. फोटो साभार-@IMDb

डीडीएलजे ने भारतीय समाज पर गहरा प्रभाव डाला. इसने प्रेम को परिवार की मंजूरी से जोड़कर एक नई परंपरा शुरू की, जो आज भी बॉलीवुड फिल्मों में दिखती है. फिल्म ने एनआरआई कल्चर को मुख्यधारा में लाया और बॉलीवुड को ग्लोबल बना. 31 साल बाद भी यह फिल्म युवाओं को आकर्षित करती है. डीडीएलजे सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक भावना है जो प्यार, सम्मान और परिवार को सेलिब्रेट करती है. फोटो साभार-@IMDb
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