संसद का बजट सत्र 2026 लगातार राजनीतिक घमासान का केंद्र बना हुआ है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण से उठा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। सूत्रों ने बताया कि विपक्ष जल्द ही लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है। इन चर्चाओं के बीच कई नेताओं ने संसद में गतिरोध को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
क्या बोलीं सांसद हरसिमरत कौर?
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के विपक्ष के कदम पर, अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने कहा, मैं उस विपक्ष का हिस्सा नहीं हूं। पिछले 18 वर्षों में, मैंने इस सदन को इस तरह से चलते हुए नहीं देखा जैसा आज चल रहा है। मैं सरकार और स्पीकर से अपील करती हूं कि यहां के सांसदों को लोगों ने चुनकर भेजा है, लेकिन अगर आप उन्हें बोलने भी नहीं देंगे, तो लोगों का पैसा सदन चलाने पर क्यों खर्च किया जा रहा है? आप पूरे विपक्ष को कैसे चुप करा सकते हैं? यह एक जरूरी मुद्दा है। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और किसानों की बदहाली का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कह आप देश के किसानों को बर्बाद करके तरक्की नहीं कर सकते। मैं सरकार से अपील करती हूं कि विपक्ष को बोलने दें; अगर विपक्ष को बोलने भी नहीं दिया जाएगा, तो यह संसद क्यों बनाई गई?
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कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने क्या कहा?
मामले को लेकर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड फ्रेमवर्क और रूस से तेल न खरीदने जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा बहुत जरूरी है। इन फैसलों का देश की विदेश नीति और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। तिवारी ने कहा विपक्ष इन कई मुद्दों पर अपनी बात रखना चाहता था, लेकिन उन्हें ऐसा करने की इजाज़त नहीं दी गई। उन्होंने यह भी कहा, सदन चलाना सरकार का काम है और अगर वह अड़ी हुई है, तो कुछ नहीं किया जा सकता। सरकार ने यह पक्का करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की है कि देश की सबसे बड़ी कानून बनाने वाली संस्था बेकार हो जाए।
अविश्वास प्रस्ताव क्या बोलीं कांग्रेस सांसद?
वहीं, कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के सवाल पर कहा, जब विपक्ष पूरी तरह निराश हो जाता है, तभी वह स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव जैसा कदम उठाता है। उन्होंने जोर दिया कि संसद देश की सबसे बड़ी पंचायत है और स्पीकर का पद पूरी तरह निष्पक्ष होना चाहिए।
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