सोनभद्र/एबीएन न्यूज। नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं, बल्कि मानव सभ्यता, संस्कृति और प्रकृति की जीवनरेखा हैं। धरती पर जीव-जन्तुओं, वनस्पतियों, मानव जीवन और कृषि व्यवस्था के लिए नदियाँ अमूल्य धरोहर रही हैं। प्रदेश सरकार ने सूख रही एवं सिल्ट से भर चुकी नदियों को पुनर्जीवित करने की दिशा में व्यापक अभियान चलाकर सवा सौ से अधिक नदियों का जीर्णोद्धार कर उन्हें नया जीवन दिया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित इस पहल के तहत प्रदेश की विभिन्न जिलों की नदियों की सिल्ट सफाई, गाद निकासी एवं प्राकृतिक स्वरूप की पुनर्स्थापना का कार्य कराया गया। प्रमुख रूप से जालौन की नून नदी, बाराबंकी की कल्याणी नदी, चित्रकूट की मंदाकिनी, अलीगढ़ की सेंगर, ललितपुर की ओड़ी, जौनपुर की कुँवर, कानपुर देहात की पांडु, गोंडा की मनवर, वाराणसी की नाद एवं वरूणा, फिरोजाबाद की सिरसा, इटावा की पुरहा, हरदोई की सई तथा अयोध्या की तमसा नदी सहित अनेक नदियों को पुनर्जीवित किया गया है। प्रयासों से नदियों में पुनः जल प्रवाह प्रारम्भ हुआ, जिससे लाखों किसानों को सिंचाई में सुविधा मिली तथा भू-गर्भ जलस्तर में भी सुधार दर्ज किया गया।
राप्ती नदी का पुनरुद्धार प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। गोरखपुर जनपद में ग्राम रूदाइन मझगांवा एवं सेमरौना के पास यह नदी दो भागों—गुर्रा और राप्ती—में विभक्त हो जाती है। पूर्व में ग्रीष्म ऋतु में यह नदी लगभग सूख जाती थी, जिससे भू-गर्भ जलस्तर गिरता था और जलीय जीव-जन्तुओं व किसानों को भारी परेशानी होती थी। पुनरुद्धार कार्य के बाद राप्ती नदी पुनः अविरल प्रवाहित होने लगी है। इसका लाभ गोरखपुर के बांसगांव एवं चौरीचौरा तहसील के 27 तथा देवरिया के रूद्रपुर तहसील के 6 ग्रामों सहित कुल 33 ग्रामों को मिला है। लगभग 60 हजार किसानों को सिंचाई सुविधा मिली है और पशु-पक्षियों के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।
राप्ती एवं गुर्रा नदी में जल प्रवाह के संतुलन से बाढ़ के दौरान होने वाली जन-धन की हानि में कमी आने की संभावना बनी है। तटबंधों पर दबाव कम हुआ है, जिससे गोरखपुर और देवरिया के 26 ग्रामों के लगभग 35 हजार कृषकों को राहत मिली है। सिंचाई विभाग द्वारा तटबंधों एवं कटाव निरोधक कार्यों को भी सुदृढ़ किया गया है, जिससे भविष्य में बाढ़ से बेहतर सुरक्षा मिल सकेगी।
नेपाल से निकलकर महराजगंज, कुशीनगर और देवरिया होते हुए बिहार में घाघरा नदी से मिलने वाली छोटी गंडक नदी का भी पुनर्जीवन किया गया। भारत में प्रवेश के बाद लगभग 10 किलोमीटर तक यह नदी लगभग समाप्तप्राय हो चुकी थी। सिंचाई विभाग ने सिल्ट, गाद और झाड़ियों की सफाई कर नदी के मूल स्वरूप को पुनर्स्थापित किया। परिणामस्वरूप नदी में पुनः जल प्रवाह प्रारम्भ हुआ और क्षेत्रीय किसानों को कृषि, पशुपालन तथा जल संरक्षण में व्यापक लाभ मिला।
प्रदेश सरकार की इस पहल से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिला है, बल्कि कृषि उत्पादन, जैव विविधता संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिली है। नदियों के पुनर्जीवन से प्रदेश में हरियाली, जल सुरक्षा और प्राकृतिक संतुलन को मजबूती मिली है।
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