उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले की तहसील इगलास के अंतर्गत आने वाले गांव सहारा खुर्द में स्थित पाताल खेड़िया मंदिर आस्था, पुराण कथाओं और लोकविश्वास का अनोखा संगम माना जाता है.
यहां भगवान शिव के तीन प्राचीन शिवलिंग स्थापित हैं, जिनकी गहराई और वास्तविक विस्तार आज तक कोई नहीं नाप सका. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार ये शिवलिंग पाताल तक स्थापित हैं.
Mahashivratri 2026: आपकी राशि का पावर कोड कौन सा शिव मंत्र है? अपना महाशिवरात्रि मैच देखें!
कार्तिकेय द्वारा की गई थी शिवलिंगों की स्थापना
स्थानीय पुरोहितों और ग्रामीण बुजुर्गों के अनुसार इन तीनों शिवलिंगों की स्थापना स्वयं भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने की थी. पौराणिक कथा के अनुसार यह स्थापना राक्षस ताड़कासुर के वध के बाद की गई थी.
ताड़कासुर वध और शिव के क्रोध की कथा
कथा के अनुसार ताड़कासुर भगवान शिव का परम भक्त था. कठोर तपस्या के बाद उसे कई वरदान मिले, जिनसे वह अत्यंत शक्तिशाली और अजेय हो गया. उसके अत्याचारों से देवता और पृथ्वीवासी त्रस्त हो उठे. तब देवताओं की रक्षा के लिए शिवपुत्र कार्तिकेय ने ताड़कासुर का वध किया.
लेकिन जब यह समाचार भगवान शिव तक पहुंचा तो वे अपने भक्त के वध से अत्यंत व्यथित हो गए और रौद्र रूप धारण करने को उद्यत हो गए. इसी समय महाशक्ति ने हस्तक्षेप कर कार्तिकेय से कहा कि यदि वे तीन शिवलिंग स्थापित कर शिव की पूजा करें तो उनका क्रोध शांत हो सकता है. इसके बाद सहारा खुर्द के पास तीन स्थानों पर शिवलिंग स्थापित किए गए.
तीन शिवलिंगों के नाम और मान्यता
इन तीनों शिवलिंगों के नाम हैं
पहला श्री कुमारेश्वर महादेव,
दूसरा प्रतिज्ञेश्वर महादेव,
और तीसरा कपालेश्वर महादेव.
स्थानीय लोग इन्हें सामूहिक रूप से ‘गुप्त शिवलिंग’ भी कहते हैं. मान्यता है कि ये शिवलिंग दिव्य शक्तियों से युक्त हैं और इनका वास्तविक विस्तार धरती के भीतर कितना गहरा है, इसका आज तक कोई अनुमान नहीं लगा सका.
शिवलिंगों की गहराई नापने का असफल प्रयास
स्थानीय पुजारी पंडित गोपाल शर्मा के अनुसार कई दशक पहले कुछ लोगों ने इन शिवलिंगों की गहराई मापने की कोशिश की थी. जब जमीन की खुदाई की गई तो कुछ ही गहराई पर पानी निकल आया, लेकिन शिवलिंग की जड़ या आधार तक कोई नहीं पहुंच सका. इसके बाद से लोगों की आस्था और भी प्रबल हो गई कि ये शिवलिंग पाताल तक स्थापित हैं.
‘पाताल खेड़िया’ नाम के पीछे की मान्यता
जिस स्थान पर ये शिवलिंग स्थित हैं, उसे पाताल खेड़िया कहा जाता है. स्थानीय जनश्रुति के अनुसार यह नाम शिवलिंगों की रहस्यमय गहराई से जुड़ा है. ग्रामीणों का मानना है कि यहां धरती के भीतर दिव्य ऊर्जा का प्रवाह है, जिसके कारण यह स्थान साधकों और भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है. सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां शीघ्र फल देती है, ऐसा विश्वास है.
महाशिवरात्रि पर लगेगा भव्य मेला
महाशिवरात्रि के अवसर पर पाताल खेड़िया मंदिर परिसर में भव्य मेला आयोजित किया जाएगा. इस अवसर पर विवाहित महिलाएं अपने परिवार के साथ यहां आकर भगवान शिव का पूजन करती हैं और पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना करती हैं.
स्थानीय प्रशासन और ग्राम समिति द्वारा सुरक्षा, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और चिकित्सा सुविधाओं की तैयारियां की जा रही हैं. अलीगढ़ शहर और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने की संभावना है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.










