विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को बदलती दुनिया की ताकत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब कोई भी देश हर क्षेत्र में हावी नहीं रह सकता, बल्कि भविष्य में दुनिया बहुध्रुवीय होगी, जहां हर क्षेत्र और हर देश की ताकत मायने रखेगी। उन्होंने कहा कि बड़े समझौते और वैश्विक दबदबे का दौर समाप्त हो चुका है। जयशंकर ने यह बात रायसीना डायलॉग में एक इंटरैक्टिव सत्र के दौरान कही। इस दौरान उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अब नई दुनिया में हर राष्ट्र को योगदान देने का मौका मिलेगा और संतुलन ही नई शक्ति बनेगी।
जयशंकर ने आगे कहा कि आज कोई भी देश इतना शक्तिशाली नहीं है कि वह दुनिया के हर क्षेत्र में प्रभुत्व रख सके। इसलिए आने वाला समय कई देशों के योगदान और ताकत के आधार पर विकसित होगा। विदेश मंत्री ने कहा कि कुछ बड़े देश कभी-कभी सीमित मुद्दों पर अस्थायी समझौते कर सकते हैं, लेकिन अब कोई ऐसा बड़ा ‘संपूर्ण सौदा’ नहीं होगा जिसे बाकी दुनिया को मानना पड़े। वह दौर समाप्त हो चुका है। जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि बहुध्रुवीयता और बहुपक्षीयता में विरोधाभास नहीं है। उन्होंने कहा कि बहुपक्षीय संस्थाओं की सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करनी चाहिए कि बहुध्रुवीयता कमजोर हो।
भारत के वॉइस ऑफ ग्लोबल साउथ की मेजबादी का किया जिक्र
इस दौरान जयशंकर ने भारत द्वारा पिछले तीन वर्षों से ‘वॉइस ऑफ ग्लोबल साउथ’ की मेजबानी का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि अब ग्लोबल साउथ देशों के लिए नए प्लेटफॉर्म की जरूरत है। जयशंकर ने दोहराया कि बड़े देशों द्वारा अपनी शक्ति दिखाकर क्षेत्रीय या वैश्विक प्रभाव बनाना और बड़े व्यापक समझौते करना अब संभव नहीं है। दुनिया अब बहुध्रुवीय और संतुलित बनने जा रही है।
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जयशंकर ने श्रीलंका-भूटान के साथ की द्विपक्षीय बैठकें
इसके साथ ही भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को श्रीलंका और भूटान के विदेश मंत्रियों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में उन्होंने भारत और इन पड़ोसी देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। जयशंकर ने भूटान के विदेश मंत्री ल्योनपो डी.एन. धुंग्येल से मुलाकात के बाद कहा कि भारत भूटान के साथ अपनी विशेष साझेदारी को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पड़ोस पहले की नीति पर जोर
वहीं, श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ के साथ बातचीत में उन्होंने द्विपक्षीय रिश्तों और क्षेत्रीय मामलों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत की ‘पड़ोस पहले’ और ‘विजन महासागर’ नीति इनके प्रयासों का मार्गदर्शन करती है। इसके साथ ही रायसीना डायलॉग के दौरान जयशंकर ने सेशेल्स, रवांडा और केन्या के विदेश मंत्रियों से भी मुलाकात की।
रवांडा के विदेश मंत्री के साथ उन्होंने आर्थिक और डिजिटल सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की, जबकि केन्या के विदेश सचिव से भारत और केन्या के संबंधों के पूरे संभावित विकास पर बातचीत हुई। जयशंकर ने सेशेल्स के विदेश मंत्री बैरी फॉरे से हाल ही में राष्ट्रपति की यात्रा के फॉलो-अप पर भी चर्चा की।
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क्या होता रायसीना डाललॉग, यहां समझिए
गौरतलब है कि रायसीना डायलॉग, जिसे ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन और विदेश मंत्रालय मिलकर आयोजित करते हैं, भारत का प्रमुख सम्मेलन है जहां वैश्विक नेता, नीति निर्माता, उद्योग विशेषज्ञ और शिक्षाविद इकट्ठा होकर भू-राजनीति और आर्थिक मामलों पर विचार-विमर्श करते हैं। इस साल इसका 11वां संस्करण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में उद्घाटित किया गया।
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