वो जो दर्द छुपाकर जीती है। वो जो टूटकर फिर से खड़ी हो जाती है। वो जो सपने पूरे करने के लिए रात-रातभर जागकर मेहनत करती है। जिम में भारी वजन उठाने से लेकर परिवार की उम्मीदों के बोझ तक। अपनी जीवटता से महिलाएं हर क्षेत्र में मजबूती से पांव जमाए खड़ी हैं। इनकी मिसाल हमें राह दिखाती हैं। खेल, कारोबार, शिक्षा व तकनीकी के क्षेत्र में भी उनकी बुलंदी दूसरों के लिए अनुकरणीय है। इनमें से किसी ने सरकारी सेवा में चयनित होकर अपनी मेधा का लोहा मनवाया तो कोई अकेले ही बेटी का भविष्य गढ़ रही है। इनकी कहानी दूसरों के लिए भी प्रेरणास्रोत है।
वेटलिफ्टिंग से परवीन खान ने बदली जिंदगी
महिला सशक्तीकरण को लेकर तमाम बातें होती हैं, बरेली के इज्जतनगर की रहने वाली परवीन खान ने अपने दम पर इसे जी कर दिखाया है। जीवन के उतार-चढ़ाव और सामाजिक दबाव के बीच परवीन खान ने हार मानने के बजाय खुद को लोहे की तरह मजबूत बनाया। आज वह दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। करीब 13 साल पहले परवीन खान का विवाह हुआ था, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उनका रिश्ता टिक नहीं सका। पति से अलग होने के बाद शुभचिंतकों ने उन पर दूसरी शादी के लिए काफी दबाव बनाया।
एक तरफ भविष्य की चिंता थी और दूसरी तरफ नन्ही बेटी माही। परवीन ने अपनी बेटी की खातिर दूसरी शादी नहीं की। अकेले ही उसकी परवरिश का फैसला किया। मायके में रहने के दौरान भाई को देखकर परवीन खान के मन में भी फिटनेस के प्रति रुचि जागी। उन्होंने न केवल अपनी शारीरिक क्षमता बढ़ाई, बल्कि इसे अपना कॅरिअर बनाने का संकल्प लिया। दो साल की कड़ी मेहनत और ट्रेनिंग के बाद उन्होंने खुद को एक पेशेवर जिम ट्रेनर के रूप में तैयार किया।