मिडिली ईस्ट में जारी जंग के आठवें दिन यानी शनिवार (7 मार्च 2026) की रात को अमेरिका ने ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला करने की चेतावनी दी. इस बीच अमेरिका ने ब्रिटेन के मिलिट्री एयरबेस को अपना B-1 बॉम्बर विमान उतारा है. यह सब ऐसे समय में हुआ जब अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हाल ही में कहा कि उनकी सेना ईरान पर हमले तेज करने वाली है. हाल ही में यूके के पीएम की स्टार्मर ने अमेरिका का अपनी सैन्य बेस इस्तेमाल करने से मना किया था, जिससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मतभेद पैदा हो गया था. हालांकि फिर बाद में उन्होंने सैन्य बेस के इस्तेमाल की इजाजत दे दी थी.
अमेरिका ने यूके में उतारा B-1 लांसर बॉम्बर
अमेरिका का 146 फीट (44.5 मीटर) लंबा बी-1 लांसर (Lancer) विमान शुक्रवार (6 मार्च 2026) की शाम को यूके के ग्लूस्टरशायर में स्थित आरएएफ फेयरफोर्ड पहुंचा. बॉम्बर मिशन के लिए लिए ये जगह यूरोप में एक ‘फॉरवर्ड ऑपरेटिंग लोकेशन’ के रूप में करता है, जो साल 1944 से सक्रिय है. ब्रिटेन ने अमेरिका को ग्लूस्टरशायर में आरएएफ फेयरफोर्ड और हिंदू महासागर में डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है. ग्लूस्टरशायर और विल्टशायर की सीमा पर स्थित आरएएफ फेयरफोर्ड का उपयोग पहले भी अमेरिका द्वारा लंबी दूरी के भारी बमबारी अभियानों को अंजाम देने के लिए किया गया है.
कितना खतरनाक है B-1 बॉम्बर?
बोइंग के अनुसार, बी-1 बॉम्बर का वजन 86 टन है और यह अमेरिकी एयरफोर्स का सबसे तेज बॉम्बर है. इसकी अधिकतम स्पीड मैक 1.25 (लगभग 900+ मील प्रति घंटा या 1,448 किमी/घंटा से अधिक) है. 4 इंजन वाला यह विमान 34,000 किलो से अधिक का पेलोड ले जा सकता है. द बोन नाम से मशहूर इस अमेरिकी बॉम्बर विमान में टारगेट को निशाना बनाने में मदद के लिए एडवांस रडार और जीपीएस सिस्टम लगे हैं. इसमें दुश्मनों से सुरक्षा के लिए इलेक्ट्रॉनिक जैमर, रडार वार्निंग और एक डेकोय सिस्टम भी मौजूद है.
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक डिफेंस एक्सपर्ट और पूर्व ब्रिटिश सेना अधिकारी जस्टिन क्रम्प ने कहा कि B-1 बॉम्बर जरूरत पड़ने पर भारी मात्रा में बमों को लंबी दूरी तक तेजी से ले जाने में सक्षम है. उन्होंने कहा, ‘यूके के आरएएफ फेयरफोर्ड से आना-जाना काफी बेहतर होगा. अमेरिका के लिए यह समझदारी भरा निर्णय है. क्योंकि अमेरिका से ईरान और वापस आने-जाने में लंबा समय लगता है.’










