प्रदेश में तापमान ही नहीं बल्कि अमेरिका-इस्राइल व ईरान के बीच छिड़ी जंग ने भी बिजली की खपत बढ़ा दी है। 15 दिनों के भीतर करीब दो हजार मेगावाट खपत बढ़ गई है। युद्ध के बीच एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति पर संकट ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। लोग भोजन पकाने के लिए एलपीजी सिलिंडर के बजाय बिजली से चलने वाले उपकरणों का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। विभागीय अधिकारी भी इसे मान रहे हैं और खपत को ध्यान में रखकर रणनीति बनाने में जुटे हैं।
प्रदेश में एक मार्च को बिजली की मांग अधिकतम 19190 मेगावाट रही। तापमान बढ़ने के साथ बिजली की मांग भी बढ़ने लगी है। इसी बीच ईरान में चल रही जंग ने गैस की किल्लत बढ़ा दी। इसका सीधा असर बिजली खपत पर दिख रहा है। हालत यह है कि 10 मार्च को खपत 21675 मेगावाट तक पहुंच गई। पिछले चार दिन से मौसम में नमी है। फिर भी बिजली की खपत 20 हजार मेगावाट के करीब बनी हुई है।
ऊर्जा प्रबंधन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि मौसम के मुताबिक खपत 18 से 19 मेगावाट के बीच होनी चाहिए लेकिन गैस की किल्लत से घरेलू उपभोक्ता गैस के बजाय बिजली से चलने वाले उपकरणों का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं। ऐसे में शहरी इलाके में खपत ज्यादा हो रही है जो लगातार बढ़ेगी। इसे ध्यान में रखकर शहरी फीडरों की निगरानी की जा रही है। सबसे ज्यादा मांग सुबह-शाम आठ से 10 बजे तक है।