दरअसल, इस सीरीज में दो टेस्ट ऐसे आए, जिनमें बुमराह नहीं खेले। इससे पहले एजबेस्टन में दूसरे टेस्ट में बुमराह नहीं खेले थे। उस मैच को भारत ने 335 रन से जीता था और इतिहास रचा था। उस मुकाबले में भी सिराज ने गेंदबाजी आक्रमण का नेतृत्व किया था और घातक गेंदबाजी की थी। उस टेस्ट में सिराज ने पहली पारी में छह विकेट और दूसरी पारी में एक विकेट लिया था। अब उन्होंने कुछ ऐसा ही ओवल में आखिरी टेस्ट में किया है। ओवल टेस्ट की पहली पारी में सिराज ने कप्तान ओली पोप, जो रूट, हैरी ब्रुक और जैकब बेथेल के महत्वपूर्ण विकेट झटके। उनके अलावा प्रसिद्ध कृष्णा ने भी चार विकेट लिए, जबकि आकाश दीप को एक विकेट मिला। सिराज ने फ्रंट से लीड किया और इंग्लैंड के मुख्य बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया।
सिराज ने अब तक 41 टेस्ट की 75 पारियों में 31.49 की औसत से 118 विकेट चटकाए हैं। इस दौरान उन्होंने चार बार पारी में पांच विकेट लिए, जबकि 15 रन देकर छह विकेट उनका सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन रहा है। इन 75 पारियों में से 28 पारियों में सिराज के साथ बुमराह नहीं थे। यानी बुमराह उन पारियों में सिराज के साथी गेंदबाज नहीं थे। वैसी 28 पारियों में सिराज ने 25.6 की बेहतरीन गेंदबाजी औसत से 44 विकेट चटकाए। वहीं, बुमराह के साथ उन्होंने टेस्ट की 47 पारियों में गेंदबाजी की है और 35 की गेंदबाजी औसत से 74 विकेट चटकाए। यानी बुमराह की गैरमौजूदगी में सिराज बेहद घातक साबित हुए हैं।
चार विकेट लेने के साथ ही सिराज के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 200 विकेट भी पूरे हो गए। उन्होंने टेस्ट में 118 विकेट लेने के अलावा वनडे में 71 और टी20 में 14 विकेट लिए हैं। वह इस मुकाम को छूने वाले भारत के 15वें तेज गेंदबाज बने। इतना ही नहीं, सिराज ने मौजूदा एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी में 18 विकेट ले लिए हैं और बेन स्टोक्स को पीछे छोड़ इस सीरीज में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए। उन्होंने 35.7 की औसत से ये विकेट लिए हैं। इस सीरीज में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 70 रन देकर छह विकेट रहा है और ऐसा उन्होंने एजबेस्टन टेस्ट में किया था। स्टोक्स के 17 विकेट हैं, लेकिन वह इस मैच में नहीं खेल रहे हैं। इन दोनों के बाद जोश टंग का नंबर आता है, जिन्होंने 15 विकेट लिए हैं।
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