देश की राजधानी दिल्ली में महिलाओं से जुड़े मामलों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. दिल्ली हाई कोर्ट ने रेखा गुप्ता सरकार से पूछा कि दिल्ली महिला आयोग में चेयरपर्सन और सदस्यों के खाली पड़े पद कब तक भरे जाएंगे. कोर्ट ने साफ कहा कि महिलाओं के हित में काम करने वाली इस संस्था को बिना स्टाफ और पदाधिकारियों के नहीं छोड़ा जा सकता.
दिल्ली हाईकोर्ट ने रेखा गुप्ता सरकार से मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और जस्टिस तेजस की बेंच ने कहा कि दिल्ली महिला आयोग महिलाओं की सुरक्षा और कल्याण से जुड़े कई अहम काम करती है. ऐसे में चेयरपर्सन और सदस्यों के पद खाली रहने का कोई कारण समझ में नहीं आता. कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वकील को निर्देश दिया कि वे बताएं कि इन पदों को भरने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं. मामले की अगली सुनवाई अगले बुधवार को होगी.
सांसद सुधाकर सिंह ने दाखिल की जनहित याचिका
यह सुनवाई बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह की जनहित याचिका पर हो रही थी. याचिकाकर्ता का कहना है कि 24 जनवरी से दिल्ली महिला आयोग लगभग बंद पड़ी है क्योंकि न तो कोई सदस्य है और न ही पर्याप्त स्टाफ. इससे महिलाओं के लिए चलने वाली कई महत्वपूर्ण सेवाएं जैसे फैमिली काउंसलिंग यूनिट, हेल्पडेस्क, रेप क्राइसिस सेल, क्राइसिस इंटरवेंशन सेंटर, मोबाइल हेल्पलाइन और महिला हेल्पलाइन 181 प्रभावित हो गई हैं.
याचिका में महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराध का जिक्र
याचिका में यह भी कहा गया कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहले से ही गंभीर स्थिति में है. नेशनल क्राइम रिकार्ड की रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ 13 हजार से ज्यादा अपराध दर्ज हुए, जिनमें 1000 से अधिक रेप के मामले शामिल थे. कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में DCW का ठप होना महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करता है.










