गोंडा में हुए हादसे में रविवार सुबह 11 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई, लेकिन किस्मत ने 14 वर्षीय रागिनी को बचा लिया। मंदिर जाने के लिए तैयार हुई रागिनी को यह कहकर समझा दिया गया कि आज तुम पापा के लिए खाना बनाने के लिए रुक जाओ। अगले सोमवार को पापा के साथ चली जाना। मायूस होकर रागिनी रोने लगी। परिजनों ने उसे किसी तरह समझाकर साथ न चलने से मना लिया। इससे उसकी जान बच गई।
रागिनी के ममेरे भाई अमरदीप कसौधन ने बताया कि पहले रामरूप की पत्नी दुर्गेश नंदिनी व रचना मंदिर जाने के लिए तैयार हुए थे। इस बीच पुत्र अमित कुमार व दूसरी पुत्री रागिनी भी जिद करने लगे। वाहन में जगह न बचने के कारण पहले अमित को रोका गया, लेकिन वह नहीं माना। इसके बाद रागिनी को यह कहकर रोक दिया गया कि तुम आज पापा के लिए खाना बनाओ।
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नहर में एसयूवी पलटने के बाद गाड़ी को बाहर निकालते ग्रामीण
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
साथ चलने की जिद न पूरी होने के कारण रागिनी मायूस थी, लेकिन महादेव ने शायद उसको जीवन रेखा लंबी बनाई थी। इसलिए इस कालरूपी यात्रा से उसे वंचित कर दिया। रागिनी का रो रोकर बुरा हाल है। मां दुर्गेश नंदिनी व भाई अमित की मौके पर ही मौत हो गई। रचना शाम तक लापता थी।
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कार्रवाई करती पुलिस
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किसका दें आधार कार्ड… पूरा परिवार ही खत्म हो गया
हादसे में प्रहलाद गुप्ता के छोटे भाई राम करन गुप्ता का पूरा परिवार ही खत्म हो गया। पोस्टमार्टम हाउस पर राजस्व टीम की और से परिवार के जीवित व्यक्तियों का आधार कार्ड व बैंक पासबुक मांगा जा रहा था, लेकिन राम करन के परिवार में तो कोई जीवित ही नहीं बचा था।
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दर्दनाक हादसे के बाद बिलखते परिजन
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रहलाद ने कहा कि कोई बचा ही नहीं, तो किसका आधार कार्ड दें। राम करन, उनकी पत्नी अनुसुइया, पुत्र शुभ व पुत्री सौम्या की मौत हो गई। बाद में 75 वर्षीय बुजुर्ग मां दयानती का आधार कार्ड देने पर सहमति बनी।
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नहर में गिरी कार
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जिंदगी की जंग में टूटती गई सांसों की डोर
भजन गाते हुए जलाभिषेक करने के लिए निकले 11 लोग देखते ही देखते काल के गाल में समा गए। वैसे उनकी जिंदगी बचाने के लिए हर किसी ने भरसक कोशिश की। किसी ने नहर में कूदकर उन्हें बचाने का प्रयास किया तो किसी ने अन्य उपाय किए। पानी के भीतर टूट रही सांसों की डोर को बचाने के लिए पूरी ताकत लगाने के बाद भी युवाओं के चेहरे पर बेबसी दिखी। साजन व शिवम का कहना था कि बहुत कुछ किया लेकिन, बचा नहीं पाए।