हस्तिनापुर के सिरजेपुर और फतेहपुर प्रेम गांव के समीप बृहस्पतिवार को तटबंध को तोड़कर बाहर निकले गंगा के पानी ने खादर क्षेत्र में जमकर तबाही मचाई हुई है। इसका खामियाजा खादर क्षेत्र के कई गांवों के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। अब यहां पर करीब आठ गांवों का संपर्क मार्ग पूरी तरह से बंद हो गया है। नाव से ही अवागमन किया जा रहा है।
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बाढ़ के पानी से पशुओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाता ग्रामीण।
– फोटो : अमर उजाला
बुधवार देर रात बिजनौर बैराज से गंगा का जलस्तर 4.01 लाख क्यूसेक पर पहुंच गया था। यह पानी देर रात तक खादर क्षेत्र में पहुंचा तो जमकर तबाही मचाई। गंगा के तेज बहाव ने कई स्थानों पर गंगा के तटबंध को क्षतिग्रस्त कर दिया। टूटे तटबंध से पानी निकलकर खादर क्षेत्र के गांवों की ओर बढ़ गया और सुबह होते-होते कई घरों में पानी भर गया। इससे ग्रामीण दहशत में आ गए।
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बोट से भ्रमण करते पीएससी के जवान।
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बृहस्पतिवार की सुबह क्षेत्र के मखदूमपुर, बस्तौरा नारंग, दूधली, लतीफपुर, भीमकुंड, किशनपुर, हादीपुर गांवड़ी, सिरजेपुर, बधवा खेड़ी आदि गांवों में बाढ़ का पानी भर गया। साथ ही इन गांवों में आवागमन के लिए मार्ग भी पूरी तरह से बंद हो गया।
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लतीफपुर गांव में भरा बाढ़ का पानी।
– फोटो : अमर उजाला
गंगा का बढ़ता जल स्तर देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने बुधवार को ही ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की अपील की थी, परंतु ग्रामीण अपने घरों को छोड़कर जाने के लिए तैयार नहीं हुए थे। बृहस्पतिवार सुबह जब चारों ओर से ग्रामीण पानी से घिर गए तो उन्हें नाव के सहारे रेस्क्यू किया गया और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
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दूधली गांव में लोगों से बातचीत करते सपा के पूर्व राज्यमंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि।
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खाद्य सामग्री, चिकित्सा सेवा कराई मुहैया
एडीएम वित्त एवं राजस्व सूर्यकांत त्रिपाठी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों में लगातार बाढ़ राहत कार्य किया जा रहा है। ग्रामीणों तक खाद्य सामग्री चिकित्सा सेवा और पशुओं के लिए आवश्यक दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं। साथ ही जो ग्रामीण गांव से बाहर आ रहे हैं, उन्हें रेस्क्यू कर लाया जा रहा है। इसके लिए पीएसी की फ्लड कंपनी और एक नाव लगाई गई है।