अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच दोनों देशों के बीच गुरुवार (26 फरवरी) को परमाणु वार्ता के लिए बैठक हुई. तेहरान पर समझौते पर सहमत होने या अमेरिकी सैन्य हमलों का सामना करने का दबाव है. जेनेवा में अमेरिका ने ईरान के सामने 5 बड़ी शर्त रखी हैं. जिसमें ईरान के अपने तीनों परमाणु संयंत्रों (फोर्डो, नतान्ज और इस्फहान) को नष्ट करना शामिल है. इसके अलावा यूएस ने ईरान अपने सभी संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका को सौंपने की शर्त रखी है.
जेनेवे में तीसरे दौर की बैठक
ओमान की मध्यस्थता के चलते ईरान और यूएस के बीच बातचीत का तीसरा दौर जिनेवा में चल रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अल्टीमेटम दिया है कि अगर दोनों देशों के बीच में न्यूक्लियर डील पर कोई सहमति नहीं बनती है तो ईरान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. वहीं, ईरान अमेरिका की कई शर्तों को मानने के लिए राजी नजर नहीं आ रहा है.
परमाणु संयंत्र को नष्ट करना
अमेरिका ने ईरान के सामने शर्त रखी है कि उसे अपने तीनों परमाणु संयंत्र (फोर्डो, नतान्ज और इस्फहान) को नष्ट करना होगा. इसके अलावा अपने सभी संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को सौंपने होंगे.
यूरेनियम संवर्धन को शून्य रखना
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की एक शर्त यह भी है कि तेहरान को यूरेनियम संवर्धन को शून्य या बहुत कम स्तर तक सीमित रखना होगा. लेकिन ईरान तेहरान अनुसंधान रिएक्टर को अपने पास रख सकता है.
शर्त मानने पर प्रतिबंधों में ढील
अमेरिका का कहना है कि शुरुआती तौर पर प्रतिबंधों में न्यूनतम ढील दी जाएगी. अगर ईरान शर्तों को मानता है तो और ढील दी जाएगी, लेकिन अगर डील फाइनल नहीं होती है तो ईरान पर यूएस और कड़े प्रतिबंध लगाएगा.
सनसेट क्लॉज से इनकार
अमेरिका ने सनसेट क्लॉज से इनकार कर दिया है. वह नहीं चाहता है कि किसी भी समझौते की अवधि पर कोई भी सीमा हो. सनसेट क्लॉज किसी भी डील में शामिल वो शर्त या प्रावधान होता है, जो बताता है कि कानून अब एक निश्चित तारीख के बाद प्रभावी नहीं होगा, जब तक इसे विधायी कार्रवाई द्वारा विस्तारित नहीं किया जाता है.
यूरेनियम संवर्धन बंद करे
अमेरिका और ईरान के बीच में यूरेनियम संवर्धन एक प्रमुख मुद्दा है. यूएस ने शर्त रखी है कि ईरान को यूरेनियम संवर्धन को बंद करना होगा. हालांकि अब तक ईरान इससे इनकार करता नजर आया है. 8 फरवरी को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यूरेनियम संवर्धन छोड़ने की बात से इनकार किया था और कहा था कि वह यूएस के साथ युद्ध की धमकियों से नहीं डरते हैं.











