Last Updated:
लता मंगेशकर, शमशाद बेगम, गीता दत्त से भी पहले एक फीमेल सिंगर का जलवा था. वह न सिर्फ गाना गाती थीं, बल्कि म्यूजिक भी कंपोज करती थीं. इस सिंगर ने गाना गाने के लिए वर्षों का तक अपना नाम छुपा कर रखा था. आज इस फीमेल…और पढ़ें
लता मंगेशकर और गीता दत्त 1950 के दशक के दौरान से गा रही थीं.साल 1912 में एक पारसी परिवार में जन्मी सरस्वती देवी का असली नाम खुर्शीद मांचेरशेर मिनोचेर होमजी था. वो एक ट्रेन्ड क्लासिकल सिंगर थीं. सरस्वती देवी एक मशहूर म्यूजिशियन थीं. उन्होंने 30 और 40 के दशक में बॉम्बे टॉकीज की कई फिल्मों में बेहतरीन म्यूजिक भी दिया. करियर की शुरुआत 1935 में ‘जवानी की हवा’ से हुई. इसके बाद उन्होंने ‘अछूत कन्या’, ‘कंगन’, ‘बंधन’ और ‘झूला’ जैसी कई फिल्मों का म्यूजिक कंपोज किया.

सरस्वती देवी ने 1940 के दशक में गाने गाए और म्यूजिक कंपोज किया. (फोटो साभारः IANS)
सरस्वती देवी ने केएल सहगल और कानन देवी जैसे सिंगर्स को दी टक्कर
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी की थी सरस्वती देवी की तारीफ
सरस्वती देवी का सबसे हिट गाना ‘अछूत कन्या’ से “मैं बन की चिड़िया बन के बन-बन बोलूं रे” था. उसमें अशोक कुमार और देविका रानी थीं. इस गाने को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी सराहा था. 1950 में वो बॉम्बे टॉकीज से अलग हुईं और दो गजलें बनाई. “लगता नहीं है दिल मेरा उजड़े दयार में” और “ये ना थी हमारी किस्मत के विसाल-ए-यार होता.” ये काफी हिट हुईं. 9 अगस्त 1980 को इनका निधन हो गया लेकिन अपने पीछे एक समृद्ध विरासत छोड़ गईं. ऐसा संगीत जो आज भी सुने तो नया सा लगता है.
रमेश कुमार, सितंबर 2021 से न्यूज 18 हिंदी डिजिटल से जुड़े हैं. इससे पहले एबीपी न्यूज, हिंदीरश (पिंकविला), हरिभूमि, यूनीवार्ता (UNI) और नेशनल दुनिया में काम कर चुके हैं. एंटरटेनमेंट, एजुकेशन और पॉलिटिक्स में रूच…और पढ़ें
रमेश कुमार, सितंबर 2021 से न्यूज 18 हिंदी डिजिटल से जुड़े हैं. इससे पहले एबीपी न्यूज, हिंदीरश (पिंकविला), हरिभूमि, यूनीवार्ता (UNI) और नेशनल दुनिया में काम कर चुके हैं. एंटरटेनमेंट, एजुकेशन और पॉलिटिक्स में रूच… और पढ़ें
![]()










