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सिर्फ 61 फिल्मों काम कर चुकी ये एक्ट्रेस पद्म श्री से सम्मानित किया गया था. 36 सालों तक अकेलेपन में रहीं. उनकी जिंदगी के अंधेरे पहलुओं ने कई लोगों को दुखी कर दिया.
नई दिल्ली. सिनेमा एक आकर्षक और लोकप्रिय माध्यम है, लेकिन इसके अंदर कई अनकही और अनदेखी अंधेरी कहानियां भी छिपी होती हैं. इसी तरह, कई बार एक्टर और एक्ट्रेसेस की जिंदगी शिखर से अचानक गिर जाती है. एक जानी मानी एक्ट्रेस ने एक फिल्म फ्लॉप होते ही एक्टिंग से दूरी बना ली थी. 50 के दशक में अपने एक्टिंग टैलेंट के दम पर उन्होंने इंडस्ट्री में धाक जमा रखी थी. लेकिन अपने करियर में कई हिट और सुपरहिट देने वाली ये एक्ट्रेस मीना कुमारी की वजह से इंडस्ट्री में अपनी जगह बना पाई थी. करियर के पीक पर एक्ट्रेस ने एक्टिंग को अलविदा कह दिया था.

‘देवदास’ की ‘पारो’, जो विदेशी अवॉर्ड पाने वाली पहली भारतीय एक्ट्रेस थीं. अब तो आप समझ गए होंगे ये एक्ट्रेस और कोई नहीं बल्कि सुचित्रा सेन थीं.

सुचित्रा को फिल्म ‘देवदास’ और ‘आंधी’ के लिए खास तौर पर जाना जाता है.अपने जमाने में करोड़ों दिलों पर राज करने वालीं सुचित्रा सेन की तुलना हॉलीवुड की फेमस एक्ट्रेस ग्रेटा गार्बो से की जाती थी.

6 अप्रैल 1931 को बांग्लादेश के पाब्ना में पैदा हुईं सुचित्रा सेन की बेटी मुनमुन सेन और नातिन राइमा सेन और रिया सेन भी जानी मानी अदाकारा हैं. सादगी और खूबसूरती की मिसाल पेश करने वालीं सुचित्रा उस दौर में भी अपनी शर्तों पर फिल्म करती थीं. बंगाली सिनेमा से उन्होंने अभिनय की शुरुआत की और बॉलीवुड में कदम रखते ही छा गई थीं. लगभग तीन दशकों तक फिल्म इंडस्ट्री पर राज करने वाली इस एक्ट्रेस की जिंदगी का दुखद अंत एक अंधेरे कमरे में हुआ, जहां वह 36 सालों तक बिना किसी को बताए रहीं.

शादी के पांच साल बाद सुचित्रा ने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी. सुचित्रा ने शुरुआत में बांग्ला सिनेमा में काम किया और 1952 में उनकी बांग्ला फिल्म ‘सारे चतुर’ रिलीज हुई, जो उनकी पहली फिल्म कही जाती है.उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन की जोड़ी बांग्ला सिनेमा की सबसे फेमस जोड़ी मानी जाती थी. हिंदी फिल्मों की बात करें तो सुचित्रा ने सबसे पहले बिमल रॉय की फिल्म ‘देवदास’ में काम किया था. अपनी पहली हिंदी फिल्म में एक्ट्रेस ने खूबसूरती और एक्टिंग का ऐसा कमाल दिखाया कि बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड अपने नाम कर लिया. इसके बाद उन्होंने भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर बनी फिल्म ‘आंधी’ में काम किया. ये फिल्म काफी विवादों में रहीं, लेकिन एक्ट्रेस को खूब सराहना मिली.

साल 1953 से 1978 के बीच सुचित्रा ने कुल 61 फिल्में की थीं, जिसमें से हिंदी कुल 6 फिल्में थीं. 1963 में मास्को अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में पुरस्कार जीतने वाली वह पहली भारतीय एक्ट्रेस बनीं. कहा जाता है कि फिल्मी दुनिया के कारण उनकी शादीशुदा जिंदगी पर असर पड़ रहा था, अनबन बड़ी तो पति दिबानाथ सेन उन्हें छोड़कर अमेरिका चले गए और साल 1970 में आदिनाथ सेन का निधन हो गया लेकिन एक्ट्रेस ने काम करना नहीं छोड़ा.

साल 1978 में फिल्म ‘प्रोनोय पाश’ आई, जो फ्लॉप हो गई तो वो अचानक फिल्में छोड़कर गुमनामी में रहने लगीं. इसके बाद, सुचित्रा ने धीरे-धीरे फिल्मों में काम करना बंद कर दिया.

कहते हैं कि इसके बाद ही सुचित्रा ने खुद को एक छोटे के कमरे में बंद कर अध्यात्म की राह पकड़ ली थी. कमरे से बाहर निकलती भी तो अपना चेहरा ढक कर रखती. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो वह रामकृष्ण मिशन की सदस्य बन गई थीं. उनका परिवार भी उनसे नहीं मिल सकता था. उन्होंने खुद को ऐसा नजरबंद किया कि जब 2005 में उन्हें दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड मिला तो वो इसे लेने तक नहीं पहुंचीं.

लंग इंफेक्शन की वजह से एक महीने तक इलाज के बाद 17 जनवरी 2014 में दुनिया छोड़ गईं. कहते हैं कि इलाज के दौरान भी अपना चेहरा ढंककर रखती थी. उनकी इस चाहत का मान अंतिम संस्कार के समय भी रखा गया. निधन के बाद भी घरवालों ने उनका चेहरा किसी को नहीं दिखाया गया.
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