दिल्ली सरकार ने कोर्ट के समन और वारंट की डिलीवरी को लेकर बड़ा कदम उठाया है. अब इन्हें डाक या पुलिस कर्मियों पर निर्भर रहने की बजाय इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भेजा जाएगा. सरकार ने “दिल्ली बीएनएसएस (समन और वारंट की सेवा) नियम, 2025” को अधिसूचित कर दिया है.
इसके तहत अब समन और वारंट सीधे व्हाट्सऐप और ई-मेल पर भेजे जाएंगे. शनिवार को अधिकारियों ने इस फैसले की जानकारी दी. बताया गया कि यह व्यवस्था कोर्ट की कार्यवाही को तेज और आधुनिक बनाने के लिए की गई है.
समय और पैसे दोनों की होगी बचत
अभी तक कोर्ट के समन और वारंट डाक या पुलिस कर्मियों के जरिए पहुंचाए जाते थे. इसमें अक्सर देरी हो जाती थी या फिर कई बार समन सही समय पर आरोपी या गवाह तक नहीं पहुंच पाता था. लेकिन अब डिजिटल डिलीवरी से यह दिक्कत खत्म होगी.
अधिकारियों का कहना है कि ई-समन और ई-वारंट से समय की बचत होगी और नोटिस की त्वरित डिलीवरी सुनिश्चित होगी. साथ ही, सरकारी संसाधनों पर भी बोझ कम पड़ेगा.
उपराज्यपाल ने दी थी मंजूरी
दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने जो अधिसूचना जारी की है, उसे इससे पहले उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना की मंजूरी मिली थी. यानी अब यह पूरी तरह से लागू हो गया है.
इस फैसले को लेकर प्रशासन का मानना है कि इससे न सिर्फ कोर्ट का कामकाज आसान होगा बल्कि आम लोगों को भी फायदा मिलेगा, क्योंकि उन्हें बार-बार कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे कि समन आया या नहीं.
आम आदमी को क्या फायदा?
ई-समन और ई-वारंट के नियम लागू होने के बाद लोगों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि उन्हें अपने फोन पर ही कोर्ट से आने वाला नोटिस मिल जाएगा. अगर आप किसी केस में गवाह हैं या किसी वजह से कोर्ट ने आपको बुलाया है, तो अब नोटिस सीधे आपके व्हाट्सऐप या ई-मेल पर भेज दिया जाएगा.
इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि नोटिस गुम न हो और समय पर सबके पास पहुंच जाए. कई बार लोग कहते हैं कि उन्हें समन मिला ही नहीं, लेकिन डिजिटल डिलीवरी से यह बहाना भी खत्म हो जाएगा.
डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा कदम
कानूनी मामलों में तकनीक का इस्तेमाल लंबे समय से चर्चा में रहा है. कोर्ट में ई-फाइलिंग से लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई तक कई कदम उठाए जा चुके हैं. अब ई-समन और ई-वारंट इस कड़ी को और मजबूत करेंगे.
अधिकारियों का कहना है कि इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए एक मजबूत तकनीकी ढांचा भी तैयार किया जा रहा है. सभी कोर्ट और संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नोटिस भेजने और डिलीवरी की जानकारी सुरक्षित रहे.