जम्मू कश्मीर के कटरा में वैष्णो देवी मार्ग और डोडा जिले में हुए भूस्खलन में 40 से ज्यादा लोगों की जान चली गई जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए. इस बड़ी आपदा के बाद से सवाल उठ रहे थे कि जब मौसम विभाग ने आपदा की आशंका जताते हुए पहले ही चेतावनी जारी कर दी थी तो फिर वैष्णो देवी यात्रा रोकी क्यों नहीं गई? भक्तों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ क्यों किया गया? ये सभी सवाल वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को निशाने पर रखकर पूछे गए थे, क्योंकि यात्रा की जिम्मेदारी श्राइन बोर्ड की है.
अब इन आरोपों का खंडन करते हुए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) ने गुरुवार (28 अगस्त) को अपना जवाब दिया है. श्राइन बोर्ड की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि मौसम विभाग की किसी भी चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया गया था. बोर्ड का कहना है कि 26 अगस्त को बादल फटने और भूस्खलन से पहले ही दोपहर में तीर्थयात्रा स्थगित कर दी गई थी. श्रद्धालुओं की सुरक्षा बोर्ड की प्राथमिकता रही है.
अर्धकुंवारी में बादल फटने से हुआ था भूस्खलन
हालांकि, श्राइन बोर्ड ने इस आपदा में हुई मौतों की संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं दी. बता दें, कटरा क्षेत्र की त्रिकुटा पहाड़ियों में स्थित अर्धकुंवारी में बादल फटने से हुए भूस्खलन ने मंदिर के मार्ग को भारी नुकसान पहुंचाया था. इसमें 34 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी, जबकि 18 अन्य घायल थे.
सुबह 10 बजे तक तीर्थायत्रा सामान्य रूप से चल रही थी
दरअसल, कल से कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि मौसम संबंधी चेतावनी की पूरी तरह से अवहेलना करते हुए और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा की कीमत पर यात्रा जारी रखी गई थी. श्राइन बोर्ड ने इन आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि वह 26 अगस्त की सुबह लगभग 10.00 बजे तक मौसम साफ और तीर्थयात्रा के लिए अनुकूल था. इस दौरान यात्रा सामान्य रूप से चलती रही. इस दौरान हेलीकॉप्टर सेवाएं भी जारी थीं.
बोर्ड ने स्पष्ट रूप से कहा कि उसने अपनी एसओपी के तहत यात्रा मार्ग पर एनफोर्समेंट स्टाफ और आपदा प्रबंधन टीमों को तैनात कर रखा था. सुरक्षा की व्यापक व्यवस्था थी. मौसम संबंधी सभी अपडेट पर कड़ी नजर रखी जा रही थी. जैसे ही मध्यम बारिश का अनुमान जारी हुआ, रजिस्ट्रेशन तुरंत रोक दिए गए.
‘पहले कभी नहीं रही भूस्खलन की आशंका’- श्राइन बोर्ड
ज़्यादातर यात्री वैष्णो माता के दर्शन करने के बाद ट्रैक से नीचे उतर रहे थे. तब तक हज़ारों यात्री अपनी तीर्थयात्रा पूरी कर चुके थे और पुराने ट्रैक पर बने शेड्स में जाकर रुक रहे थे. ये वे जगहें थीं, जहां पहले कभी भूस्खलन की आशंका नहीं रही. श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए ये शेड्स ट्रैक के सबसे सुरक्षित इलाकों में बनाए गए हैं.
वहीं, कटरा और अर्धकुंवारी के बीच जो नए ट्रैक बने हैं, वे संवेदनशील हैं और उनपर भूस्खलन की आशंका रहती है. इस मार्ग को तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए 24 अगस्त से ही बंद कर दिया गया था.