अमेरिका की एक अपील अदालत ने शुक्रवार (स्थानीय समयानुसार) को एक बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अधिकांश टैरिफ गैरकानूनी हैं। अदालत का यह फैसला उस नीति को बड़ा झटका है, जिसमें ट्रंप ने टैरिफ को अपनी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक रणनीति का अहम हथियार बनाया था। हालांकि, अदालत ने कहा है कि ये टैरिफ 14 अक्तूबर तक लागू रहेंगे, ताकि ट्रंप प्रशासन के पास अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का समय रहे। बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अलग-अलग देशों पर एक फरवरी से टैरिफ लगाया था। हालांकि, बाद में टैरिफ वसूलने की तारीखें आगे भी बढ़ाई गईं और कुछ देशों को छूट भी दी गई। दो अप्रैल को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रेसिप्रोकल टैरिफ की दरों का एलान करने खुद सामने आए थे और टैरिफ वसूले जाने वाले देशों की सूची के साथ उनकी तस्वीर लंबे समय तक सुर्खियों में भी रही।
अपील अदालत के फैसले के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, ‘सभी टैरिफ अभी भी लागू हैं! आज एक बेहद पक्षपाती अपील अदालत ने गलती से कहा कि हमारे टैरिफ हटा दिए जाने चाहिए, लेकिन वे जानते हैं कि अंत में जीत अमेरिका की ही होगी। अगर ये टैरिफ कभी हट भी गए तो यह देश के लिए एक बड़ी आपदा होगी। अमेरिका अब और भारी व्यापार घाटे और दूसरे देशों, चाहे वे दोस्त हों या दुश्मन की तरफ से लगाए गए अनुचित टैरिफ और अन्य व्यापार बाधाओं को बर्दाश्त नहीं करेगा। इससे हमारे उत्पादक, किसान और बाकी सभी कमजोर होते हैं।
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ट्रंप के टैरिफ से वित्तीय बाजारों में बढ़ी अस्थिरता
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में टैरिफ को विदेश नीति का आधार बनाया है, तथा इसका इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने और अमेरिका को माल निर्यात करने वाले देशों के साथ व्यापार समझौतों पर पुन: बातचीत करने के लिए किया है। टैरिफ से ट्रंप प्रशासन को व्यापारिक साझेदारों से आर्थिक रियायतें हासिल करने का लाभ तो मिला, लेकिन वित्तीय बाजारों में अस्थिरता भी बढ़ी।
कानून में टैरिफ लगाने की शक्ति स्पष्ट रूप से शामिल नहीं
अदालत ने अपने आदेश में कहा, कानून राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल के समय कई तरह की कार्रवाई की अनुमति देता है, लेकिन इनमें टैरिफ, शुल्क या इसी तरह की कोई कार्रवाई करने या कर लगाने जैसी शक्ति स्पष्ट रूप से शामिल नहीं है। हालांकि, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग, व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय और वाणिज्य विभाग ने इस फैसले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
फेडरल सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने सुनाया फैसला
यह फैसला वाशिंगटन डीसी स्थित फेडरल सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने सुनाया। इसमें अप्रैल में ट्रंप द्वारा अपने व्यापार युद्ध के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ और फरवरी में चीन, कनाडा व मैक्सिको पर लगाए गए अलग-अलग टैरिफ की वैधता पर सवाल उठाया गया। हालांकि, यह फैसला उन शुल्कों पर लागू नहीं होगा, जो ट्रंप ने अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत- जैसे स्टील और एल्युमीनियम आयात पर लगाए थे।
अदालत ने कहा- IEEPA में कहीं भी टैरिफ का उल्लेख नहीं
राष्ट्रपति ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) के तहत दोनों प्रकार के शुल्कों और हाल के शुल्कों को उचित ठहराया था। यह कानून राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपात स्थितियों के दौरान ‘असामान्य और असाधारण’ खतरों से निपटने की शक्ति देता है। लेकिन अदालत ने कहा, ‘IEEPA में कहीं भी टैरिफ का उल्लेख नहीं है, न ही ऐसे प्रावधान हैं जो राष्ट्रपति के शुल्क लगाने के अधिकार पर स्पष्ट सीमाएं निर्धारित करते हों। कांग्रेस ने यह अधिकार राष्ट्रपति को देने का इरादा कभी नहीं जताया था।’
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ट्रंप पहले राष्ट्रपति, जिन्होंने इस कानून के तहत टैरिफ लगाए
1977 का यह कानून आम तौर पर दुश्मन देशों पर प्रतिबंध लगाने या उनकी संपत्ति फ्रीज करने के लिए इस्तेमाल होता रहा है। ट्रंप पहले ऐसे राष्ट्रपति बने, जिन्होंने इसके तहत टैरिफ लगाए। उन्होंने इसे सही ठहराते हुए कहा था कि व्यापार घाटा, घटती अमेरिकी विनिर्माण क्षमता और नशे की तस्करी जैसे मुद्दे राष्ट्रीय आपातकाल हैं। ट्रंप के न्याय विभाग ने तर्क दिया कि IEEPA राष्ट्रपति को आयात को नियंत्रित करने या रोकने का अधिकार देता है, और उसी आधार पर टैरिफ भी लगाए जा सकते हैं।
600000 वेनेजुएलावासियों के लिए कानूनी सुरक्षा समाप्त करने पर रोक
ट्रंप प्रशासन को एक अन्य अपील अदालत के फैसले से भी झटका लगा है। सैन फ्रांसिस्को स्थित अमेरिका की 9वीं सर्किट अपील अदालत की तीन जजों की पीठ ने शुक्रवार (स्थानीय समयानुसार) को ट्रंप प्रशासन की उस योजना पर रोक लगा दी, जिसके तहत 600,000 वेनेजुएलावासियों की अमेरिका में रहने और काम करने की कानूनी सुरक्षा खत्म की जानी थी। अपील अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। फिलहाल यह साफ नहीं है कि शुक्रवार के आदेश का असर उन 3.5 लाख वेनेजुएलावासियों पर होगा या नहीं, जिनकी अस्थायी संरक्षित दर्जा (TPS) अप्रैल में खत्म हो गई थी। वहीं, करीब 2.5 लाख लोगों की सुरक्षा 10 सितंबर को समाप्त होने वाली है।