उधर, 17 वर्षीय दो आरोपियों को शुक्रवार सुबह दिल्ली पुलिस ने पकड़ लिया। दोनों बागपत के निवासी हैं। सोशल मीडिया के जरिये उनकी गिरोह में भर्ती की गई थी। दोनों नाबालिग शूटर मुठभेड़ में मारे गए बागपत निवासी अरुण को जानते थे। नाबालिगों को अरुण ने अभिनेत्री के घर पर गोली चलाने के लिए कहा था। चार से पांच लाख रुपये में डील हुई थी।
पहले दिन नाबालिगों ने चलाई थी गोली
दिल्ली में स्पेशल सेल के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त प्रमोद सिंह कुशवाह ने बताया कि गिरफ्त में आए दोनों नाबालिगों ने दिशा पाटनी के घर पर पहले दिन दो से तीन गोलियां चलाई थीं। उस दौरान दिशा के परिजनों को इसकी जानकारी नहीं हुई थी। दूसरे दिन अरुण और रविंद्र ने 10-15 राउंड फायरिंग की थी। फायरिंग की दोनों घटनाओं को लेकर बरेली पुलिस ने एक ही प्राथमिकी दर्ज कर रखी है।
गैंग लीडर रविंद्र की पुलिस की गोली से मौत
कहावत है कि अति आत्मविश्वास कभी-कभी इन्सान को ले डूबता है तो कई बार आलसी व्यक्ति किस्मत से बच निकलता है। कुछ ऐसा ही इस फायरिंग कांड में दिखा। यहां अति आत्मविश्वास में चेहरा खोलकर वारदात करने वाले गैंग लीडर रविंद्र की पुलिस की गोली से मौत हो गई, जबकि सुस्ती और आरामतलबी ने रामनिवास की जान बचा ली।
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