रामगंगानगर आवासीय योजना के लिए दो दशक पहले किसानों की जमीन लेने वाले बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) को हाईकोर्ट में मुंह की खानी पड़ी है। उसे डोहरिया गांव के सगे भाइयों रामपाल व कालीचरन को ब्याज के 87.17 लाख रुपये चुकाने पड़े हैं। दोनों भाइयों की कृषि योग्य जमीन लेकर बीडीए ने 17 साल बाद उनको 96.71 लाख रुपये मुआवजा दिया था। इस पर अब मोटा ब्याज चुकाना पड़ा है। बीडीए की इस कार्यशैली से जहां सरकार की छवि धूमिल हुई। शासन को आर्थिक झटका भी लगा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ से दो जनवरी 2024 को पारित आदेश का समय रहते अनुपालन नहीं करने पर बीडीए और विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) को न्यायिक अवमानना का सामना करना पड़ा है। 21 अगस्त 2025 को अवमानना वाद दाखिल हुआ तो आनन-फानन बीडीए ब्याज की भरपाई के लिए तैयार हो गया।
एसएलएओ दफ्तर पहुंचा दिया चेक
वाद की सुनवाई के लिए नियत तिथि से एक दिन पहले 10 सितंबर को ही 87,17,548 रुपये का चेक काटकर एसएलएओ दफ्तर पहुंचा दिया। साथ ही, धनराशि अदा करने का हलफनामा हाईकोर्ट में प्रस्तुत कर दिया। हाईकोर्ट की सिंगल बेच ने 11 सितंबर को सुनवाई करते हुए आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने और हलफनामा दायर करने के लिए एसएलएओ को दो सप्ताह का मौका दिया है। अब 25 सितंबर को इसकी सुनवाई होगी।
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इधर, हाईकोर्ट की नाराजगी देख एसएलएओ ने बीडीए की तरफ से मिले चेक को भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के प्रबंधक भेजकर वादी पक्ष को भुगतान करने की तैयारी तेज कर दी है। कालीचरन के बेटे सुनील ने बताया कि हाईकोर्ट से उनको न्याय मिला है। इससे उनका परिवार बेहद खुश है। पिता और चाचा के बैंक खाते में ब्याज की धनराशि आ गई है।










