आगरा के कागारौल में दो दिन पहले तक जहां पर मंगल गीत गूंज रहे थे, वहां आज करुण क्रंदन और आंखों में आंसू हैं। शुक्रवार शाम को एक-एक करके 5 के शव आए तो गांव कुसियापुर के लोगों का कलेजा ही फट पड़ा। हर तरफ अपनों के जाने का गम। रोते-बिलखते परिजन को संभालने वालों के भी आंसू निकलने लगे। एक साथ 5 चिताएं जलीं तो हर आंख नम हो गई। दो दिन से गांव के घरों में चूल्हे भी नहीं सुलगे हैं।

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आगरा हादसा।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मृतक ओमपाल के घर का दृश्य बेहद हृदयविदारक था। उनका 5 वर्षीय बेटा वरुण जहां बार-बार घर में पिता को ढूंढ रहा था, वहीं छह माह के बेटे लोकेंद्र को देखकर ऐसा लग रहा था कि मानो पिता के सीने से लगने का इंतजार कर रहा हो। लेकिन दोनों के सिर से पिता का साया उठ चुका था। गांव के ही यादव सिंह के दोनों बेटे गगन और हरेश भी हादसे का शिकार हो गए। इनमें गगन का शव घर पहुंचते ही परिजन बेहाल हो गए। मां प्रेमवती गश खाकर गिर पड़ी। हरेश अभी लापता है।

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आगरा हादसा।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अभिषेक के घर का भी बुरा हाल था। अभिषेक घर का इकलाैता चिराग था। माैत की सूचना मिलते ही उसकी मां की हालत बिगड़ गई। वह पहले ही अस्पताल में भर्ती थीं। भगवती का शव देखते ही पत्नी चंचल रोने लगी और बेसुध हो गई। किसी तरह परिवार के लोगों ने उसे संभाला। उसकी 8 महीने पहले ही अभिषेक से शादी हुई थी। वहीं, 15 वर्षीय मनोज का शव देखकर मां राजन देवी भी फूट-फूटकर रोने लगीं। उसकी बहन शीला बेसुध होकर गिर पड़ी। पड़ोसी व रिश्तेदारों ने उनको संभाला।

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एक साथ हुआ शवों का अंतिम संस्कार।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शुक्रवार देर शाम सभी पांचों का अंतिम संस्कार नदी किनारे सरकारी भूमि पर किया गया। अभिषेक को उनके चचेरे भाई रोहित, ओमपाल को उनके बेटे वरुण, भगवती को छोटे भाई हरिओम, गगन को चचेरे भाई आकाश और मनोज को बड़े भाई पंकज ने मुखाग्नि दी। गांव में एक साथ 5 चिताओं के जलता देख हर आंख नम हो गई। घटना से आसपास के क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है। घरों में चूल्हे भी नहीं सुलगे हैं।

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अंतिम संस्कार के दाैरान जुटी ग्रामीणों की भीड़।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पोस्टमार्टम हाउस पर गूंजते रहे सायरन, नहीं थमीं सिसकियां
सायरन की आवाज आते ही परिजन उसकी और दौड़ पड़ते। शव जैसे ही बाहर निकालते परिजन दहाड़ मारकर रोने लगते। पड़ोसी उनको ढांढस बंधाते हुए संभालने की कोशिश करते। शव अंदर रखने के बाद अपनों का नाम लेकर परिजन सिसकियां भरने लगते। पोस्टमार्टम हाउस पर इस हृदयविदारक दृश्य से हर कोई दुखी दिखा। बृहस्पतिवार की रात से शवों को लाने का सिलसिला शुरू हुआ। एंबुलेंस में एक-एक करके शुक्रवार की दोपहर तक पांच शव लाए गए। इनके परिजन पहले ही पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए।
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