देश के अलग अलग राज्यों की आधार कार्ड बनाने वाली सरकारी साइटों को हैककर आधार कार्ड सहित अन्य फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह का एसटीएफ ने भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में 6 नवंबर तड़के गिरोह के दो जनसेवा केंद्र संचालक सदस्यों को क्वार्सी के जीवनगढ़ इलाके से दबोचा है। दोनों के तार दिल्ली के हैकर गिरोह से जुड़े हैं, जिन्होंने अब तक उत्तराखंड-झारखंड सहित कई राज्यों की सरकारी साइटों को हैककर आधार कार्ड सहित अन्य प्रमाण पत्र बनाना स्वीकारा है। दोनों को पूछताछ के बाद मुकदमा दर्ज कर शाम को जेल भेज दिया गया।
सीओ तृतीय सर्वम सिंह के अनुसार एसटीएफ लखनऊ यूनिट को इस हैकर गिरोह के विषय में सूचनाएं मिल रही थीं। जिस पर काम करते हुए बुधवार रात में टीम यहां पहुंची। क्वार्सी पुलिस के सहयोग से इनपुट जुटाकर मुखबिर की मदद से बृहस्पतिवार तडक़े जीवनगढ़ गली नंबर 12 में अगल-बगल में दो घरों के बाहर दुकानों में संचालित जनसेवा केंद्रों पर छापा मारा। यहां से दोनों के संचालक साजिद हुसैन व नईमुद्दीन को दबोच लिया गया। दोनों जगहों पर फर्जीवाड़ा कर बनाए गए आधार कार्ड सहित उन्हें बनाने के संसाधन व अन्य उपकरण मिले। साथ में उनके कंप्यूटर सिस्टम में कई सरकारी साइटों के विंडो भी मिले। पूछताछ में उनके द्वारा जो खुलासे किए गए, उन्हें सुन खुद एसटीएफ टीम दंग रह गई।
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सीओ के अनुसार साजिद ने बताया कि 2016-17 से उसने आधार कार्ड बनाने वाली टेक स्मार्ट कंपनी में काम किया है। 2020 में आधार कार्ड डाकघरों से बनने लगे तो उसकी कंपनी का काम खत्म हो गया। उसकी जॉब चली गई। तभी उसने व उसके पड़ोसी नईमुद्दीन ने जनसेवा केंद्र का संचालन शुरू कर दिया। जिसके जरिये वह जन्म, मूल, आय, जाति आदि के प्रमाण पत्र बनाने के आवेदन व डेटा फीडिंग का काम नियमानुसार करते रहे। करीब एक वर्ष पहले उसका संपर्क दिल्ली के आकाश नाम के व्यक्ति से हुआ। जिसने उसे राज्य सरकारों की आधार कार्ड बनाने वाली अधिकृत साइटों को हैककर उनका एक्सिस देना तय किया। उसने अपने अलीगढ़ के ही दो बंदे अमित व शरद को हमारे पास भेजा। उन्होंने हमारे कंप्यूटर सिस्टम, थंब व आई इंप्रेशन लेने वाली मशीनों में साफ्टवेयर इंस्टाल किया जिसके बदले में 50-50 हजार रुपये लिए गए।










