सहारा इंडिया समूह की भोपाल और लखनऊ स्थित जमीनों को रियल एस्टेट कंपनियों को बेचने के मामले में पूर्व डिप्टी डायरेक्टर ओपी श्रीवास्तव पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपना शिकंजा कसा है। दरअसल, इन जमीनों को ईडी जब्त कर चुका था, इसके बावजूद इनको बेचा जा रहा था। जल्द ही ईडी, कोलकाता की टीम दोनों शहरों समेत सभी जब्त जमीनों पर जाकर भौतिक रूप से कब्जा लेगी, जिससे इनको रियल एस्टेट कंपनियों से खरीदने वाले निवेशकों की जमापूंजी खतरे में पड़ सकती है।
सूत्रों की मानें तो लखनऊ में भी सहारा समूह की बेशकीमती जमीनों को पिनटेल और अमरावती ग्रुप को बेचने की शिकायत ईडी को मिली है, जिसके बाद जल्द कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी है। इन जमीनों को बेचने को लेकर सहारा समूह के संचालकों में बीते कुछ महीनों से विवाद भी चल रहा था।
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बता दें कि सहारा समूह ने राजधानी के गोमतीनगर स्थित सहारा अस्पताल को मैक्स ग्रुप को 900 करोड़ रुपये में बेचा था, हालांकि इसकी अनुमति ली गई थी। इसकी आड़ में बाकी जमीनों को भी बेचने का सिलसिला शुरू हो गया, जिसमें खासकर सुल्तानपुर रोड स्थित एलडीए द्वारा सहारा को टाउनशिप विकसित करने के लिए दी गई भूमि शामिल थी। इसे सहारा के मुख्य संचालकों के नाम से खरीदा गया था।
कई पदाधिकारी हुए अंडरग्राउंड
ओपी श्रीवास्तव के गिरफ्तार होने के बाद सहारा में उनके करीबी तमाम वरिष्ठ अधिकारी अंडरग्राउंड हो गए हैं। ईडी ने इनमें से कई लोगों को नोटिस देकर तलब किया है, हालांकि वह जांच एजेंसी के सामने पेश होने से कतरा रहे हैं। इनमें ओपी श्रीवास्तव के कार्यालय के कुछ अधिकारी भी शामिल हैं, जिन पर निवेशकों की रकम हड़पने, जमीनों का सौदा कराने और ईडी की जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप है।