सीबीआई ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) की शिकायत पर कांधला-गोरखपुर एलपीजी पाइपलाइन प्रोजेक्ट में 6.50 करोड़ रुपये का फर्जी तरीके से मुआवजा देने के मामले में मंगलवार को कई शहरों में छापे मारे। लखनऊ, नोएडा और प्रयागराज में आरोपियों के 5 ठिकानों पर छापा मारकर घोटाले से जुड़े अहम सुबूत जुटाए हैं। सीबीआई, लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने आईओसीएल के चीफ विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) की शिकायत पर प्राथमिकी भी दर्ज की है।
आईओसीएल के सीवीओ अनंत सिंह (आईपीएस) ने सीबीआई से शिकायत की थी कि आईएचबी लिमिटेड कांधला-गोरखपुर एलपीजी पाइपलाइन प्रोजेक्ट के लिए यूपी में मुआवजा देने का काम करता है। यह प्रोजेक्ट आईएचबी लिमिटेड, आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल का जॉइंट वेंचर है। इसकी शुरुआती लागत करीब 1000 करोड़ रुपये है। यह प्रोजेक्ट गोरखपुर, मध्य प्रदेश और यूपी के बीच करीब 2800 किमी में फैला है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि सेंट्रल विमेनेंट पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन लेने की देखरेख के लिए एक सक्षम अथॉरिटी (सीए) नियुक्त करता है। सीए ही जमीन का सर्वे व स्वामित्व का सत्यापन करने, फसल और निर्माण का आकलन करता है। इसके बाद नुकसान और मुआवजे की घोषणा की जाती है। मुआवजा देने की जिम्मेदारी सीए की होती है।
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उन्होंने शिकायत में बताया है कि अधिकारियों और बाहरी लोगों की मिलीभगत करके गलत नाम मुआवजे की सूची में शामिल किए गए और जानबूझकर बैंक अकाउंट नंबर में बदलाव कर मुआवजा अपात्रों को दे दिया गया। सबसे ज्यादा फर्जी मुआवजा प्रयागराज और भदोही में दिया गया। इसके अलावा उन्नाव, कानपुर नगर, कानपुर देहात, ललितपुर और रायबरेली में भी मुआवजे देने में गड़बड़ियां मिली हैं।











