इसका पर्दाफाश पुलिस की जांच में हुआ। पुलिस की पूछताछ में गौरव ने बताया कि वह अपने साले अभिषेक कुमार की मदद से सोशल मीडिया पर खुद को आईएएस अफसर के रूप में प्रमोट करता था। अभिषेक के दोस्त परमानंद गुप्ता से पहचान होने के बाद यूपी में उसका नेटवर्क तेजी से बढ़ा।
बीते तीन साल में उसने यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड में बिल्डरों और कारोबारियों को सरकारी काम दिलाने का झांसा देकर पांच करोड़ रुपये और दो इनोवा कारें तक ठग लीं।
गौरव ने पुलिस को बताया कि एक साल तक अंडरग्राउंड रहने के दौरान उसने बिहार के सीतामढ़ी के रीगा निवासी प्रीति को प्यार के जाल में फंसाकर घर से भगा लिया और मंदिर में शादी कर ली।
पैसे की जरूरत पड़ी तो अभिषेक के साथ मिलकर नौकरी और सरकारी टेंडर दिलाने का फर्जी रैकेट खड़ा कर दिया। अभिषेक सॉफ्टवेयर जानता था और सीतामढ़ी में उसकी पकड़ मजबूत थी, जिससे गौरव के लिए फर्जी पहचान बनाना आसान हो गया।
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