नई दिल्ली. एक छोटे से पंजाबी गांव में जन्मा यह बच्चा सड़कों पर घूमने वाले फकीर की मधुर आवाज से इतना प्रभावित हुआ कि उसकी जिंदगी संगीत की हो गई. फकीर के पीछे-पीछे चलकर, उसकी भक्ति भरी धुनें सुनकर और कभी-कभी नकल उतारकर उसने स्वरों से प्यार कर लिया. परिवार रूढ़िवादी था, संगीत को गुनाह समझता था, मगर उसकी लगन ने सबको जीत लिया. बस यहीं से शुरू हुई एक ऐसी आवाज की यात्रा, जो भारतीय सिनेमा की सबसे अमर धरोहर बनी. इस स्वर ने 11 भारतीय भाषाओं में लगभग 26,000 गाने गाए- हिंदी, पंजाबी, बंगाली, मराठी, गुजराती, तेलुगु, कन्नड़, सिंधी, असमिया और अन्य में. रोमांस की मिठास, दर्द की गहराई, देशभक्ति का जोश, भजन की भक्ति, क़व्वाली का रंग और तेज नृत्य संगीत-हर भाव को इसने अपनी लचीलापन और मिठास से समेट लिया. फाइल फोटो.
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