प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, चार नंबर लाइन पर पहुंचते ही बाइक अचानक बंद हो गई। तभी तेज रफ्तार से आ रही गरीब रथ ट्रेन ने बाइक को चपेट में ले लिया। टक्कर इतना तेज लगी कि पांचों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जीआरपी ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजते हुए मामले की जांच शुरू कर दी।
शॉर्टकट बना जानलेवा
मजदूरी करने वाले हरिओम बुधवार दोपहर रोजा की मठिया कॉलोनी में रहने वाले अपने पिता लालाराम के घर आए थे। शाम को सभी लोग लखीमपुर खीरी स्थित अपने गांव लौट रहे थे। समय बचाने के फेर में उन्होंने मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग से गुजरने का रास्ता चुना, जो उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन गया।
ट्रेन को देखकर आवाज लगाई, पर शोर में सुन नहीं पाए बाइक सवार
लखनऊ के रहने वाले राहुल कुमार बनके गांव में पीएचसी पर कार्यरत हैं। वह घर जाने के लिए बरेली-बनारस एक्सप्रेस का रोजा रेलवे स्टेशन पर इंतजार कर रहे थे। राहुल ने बताया कि ट्रेन आने पर बाइक सवार को पटरी पर देखकर आवाज लगाई थी, लेकिन उनकी आवाज ट्रेन के शोर में नहीं सुनाई दी और हादसा हो गया।
आधे घंटे तक रुकी ट्रेन
हादसे के बाद लोको पायलट ने ट्रेन रोककर इंजन में फंसे बाइक के हिस्सों को निकलवाया। करीब 30 मिनट बाद ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया जा सका। सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे। शवों को देखकर पिता लालाराम बदहवास होकर बिलख पड़े।
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