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Kuch Kuch Hota hai Movie Uknown Facts : बॉलीवुड में 90 का दौर म्यूजिकल रोमांटिक फिल्मों का था. बॉक्स ऑफिस पर म्यूजिकल रोमांटिक फिल्में छाई रहती थीं. इस दौर में कुमार सानू-उदित नारायण और अलका याज्ञनिक की तिकड़ी ने इंडस्ट्री में राज किया. तीनों की आवाज रोमांस-लव और सैड सॉन्ग का पर्याय बन गई. रोमांटिक और चुलबुले अंदाज वाले गाने उदित नारायण ने गाए. वो स्वभाव से भी बहुत ही खुशमिजाज इंसान हैं. संगीतकार जोड़ी जतिन-एक ललित ने एक सैड सॉन्ग उदित नारायण को दिया. उदित उसे रोमांटिक अंदाज में गाने लगे. दोनों ने उदित को टोका. बात नहीं बनी. बाद में जतिन-ललित ने एक ऐसी ट्रिक अपनाई कि गाना भी सुपरहिट हो गया और फिल्म ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई.
बॉलीवुड के फेमस सिंगर उदित नारायण पर्सनल लाइफ में भी बहुत खुशमिजाज है. उनकी आवाज में एक खनक-चुलबुलापन है. उन्होंने लव-रोमांटिक सॉन्ग ही ज्यादातर गाए हैं. दर्दभरे सॉन्ग कम ही गाए हैं. 90 के दशक में कुमार सानू और उदित नारायण बॉलीवुड इंडस्ट्री में छाए हुए थे. एक बार संगीतकार जतिन-ललित ने उन्हें एक दर्द भरा सॉन्ग गाने का ऑफर दिया. उदित नारायण को फिल्म की सिचुएशन पता नहीं थे. उन्होंने रोमांटिक अंदाज में गाना शुरू किया. यह गाना था : ‘तुझे याद ना मेरी आई, किसी से अब क्या कहना….’. आगे क्या हुआ, आइये जानते हैं दिलचस्प किस्सा…..

टूटे दिलवाले आशिकों का फेवरेट सॉन्ग ‘तुझे याद ना मेरी आई’ 16 अक्टूबर 1998 को रिलीज हुई फिल्म ‘कुछ-कुछ होता है’ में था. करण जौहर ने फिल्म को डायरेक्ट किया था. अलका याज्ञनिक ने अपने एक इंटरव्यू में इस फिल्म से जुड़ा दिलचस्प किस्सा शेयर किया था. अलका ने कहा था, ‘उदित नारायण सैड सॉन्ग भी मुस्कुरा कर गाते हैं. जैसे ही उदित ने ‘तुझे याद ना मेरी आई…’ गाना रोमांटिक अंदाज में गाया तो जतिन-ललित ने उन्हें टोक दिया. दरअसल, उदित स्वभाव से ही खुशमिजाज हैं. जब बात नहीं बनी तो जतिन-ललित ने उनका मुखड़ा हटा दिया.’

‘तुझे याद ना मेरी आई..’ सॉन्ग की शुरुआत मनप्रीत अख्तर एक शेर ‘हो मेरे रब्बा इश्क किसी को ऐसे ना तड़पाए…’ से शुरू होता है. इसके अंतरे में अलका याज्ञनिक की आवाज आती है. उदित नारायण पूरे गाने में सिर्फ अंतरा और उड़ान गाते हैं. वो पूरे गाने में कहीं पर भी ‘तुझे याद ना मेरी आई’ नहीं आते हैं.
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संगीतकार जतिन पंडित के भाई ललित पंडित ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘तुझे याद ना मेरी आई, किसी से अब क्या कहना…’ उनकी एक्ट्रेस बहन सुलक्षणा पंडित गाया करती थीं. ओरिजनल सॉन्ग पंजाबी में था. गाने के बोल पंजाबी ‘तैनू याद ना साडी आई, तैनू खत की लिखना. दिल रोया कि अख भर आई, कि खत तैनू की लिखना…’ थे. गीतकार आनंद बख्शी ने जब यह गाना सुना था तो वो रो पड़े थे. यह गाना डीडीएलजे के लिए रिकॉर्ड किया गया था. डीडीएलजे में कोई सैड सिचुएशन बनी ही नहीं, इसलिए यह सॉन्ग नहीं लिया गया. दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे फिल्म 20 अक्टूबर 1995 में रिलीज हुई थी.

आगे चलकर जब करण जौहर ‘कुछ-कुछ होता है’ फिल्म बना रहे थे तो यश चोपड़ा की पत्नी पामेला चोपड़ा ने करण जौहर को फोन करके ‘तैनू याद ना साडी आई…’ गाना जतिन-ललित से सुनने की सलाह दी. पामेला चोपड़ा करण जौहर की रिश्ते में सगी मामी थीं. करण जौहर के पिता यश जौहर जाने-माने डायरेक्टर-प्रोड्यूसर यश चोपड़ा के सगे जीजा थे. पामेला चोपड़ा को फिल्म की कहानी पता थी. उन्होंने करण जौहर से कहा कि सैड सिचुएशन के लिए गाना परफेक्ट रहेगा. करण को ट्यून पसंद आई. सिर्फ गाने के बोल बदल दिए गए.

ललित पंडित ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि इस गाने के लिए पंजाब की मशहूर फॉक सिंगर मनप्रीत अख्तर से उन्होंने संपर्क किया था. गाने का शुरुआती शेर और मुखड़ा मनप्रीत अख्तर ने ही गाया है. उनका अब निधन हो चुका है. वो पंजाब के एक स्कूल में टीचर थीं. लोक गायक के रूप में मशहूर थीं. उनकी आवाज इतनी बुलंद थी कि गाना रिकॉर्ड करते समय माइक उनसे आठ फीट की दूरी पर रखा गया था.

संगीतकार जतिन-ललित ने 90 के दशक में एक से बढ़कर एक गाने दिए. उन्होंने अपने संगीत सफर की शुरुआत प्राइवेट एल्बम ‘रिद्ममेटिक लव’ से की थी. इस एल्बम की कई ट्यून पर आगे चलकर मशहूर सॉन्ग बनाए गए जिनमें से ‘बिन तेरे सनम, मर मिटेंगे हम, आ मेरी जिंदगी’ और ‘बस इतना सा ख्वाब है’ शामिल हैं. जतिन -ललित की जोड़ी सबसे ज्यादा चर्चा में ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ फिल्म में म्यूजिक देने के बाद आई. दोनों रातोंरात स्टार बन गए. नदीम-श्रवण, आनंद-मिलिंद के बाद यह 90 के दशक में यह तीसरी संगीतकार जोड़ी थी जिसकी सबसे ज्यादा होती थी. जतिन-ललित ने ‘कुछ-कुछ होता है’, ‘मोहब्बतें’, ‘कभी खुशी कभी गम’ और ‘फना’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में म्यूजिक दिया.

बहुत कम लोग इस तथ्य को जानते होंगे कि इसी फिल्म का एक और फेमस सॉन्ग ‘लड़की बड़ी दीवानी है, सपना है सच है कहानी है’ आदित्य चोपड़ा ने लिखा था. यह गाना शूटिंग से चंद घंटों मुंबई में तैयार करके ऊटी भेजा गया था, जहां पर करण जौहर यूनिट के साथ थे. आदित्य चोपड़ा ने ही जतिन-ललित का म्यूजिक फाइनल किया था. ‘कुछ-कुछ होता है’ मूवी बतौर डायरेक्टर करण जौहर की पहली फिल्म थी लेकिन पूरा काम यश चोपड़ा का परिवार ही देख रहा था. इस आइकॉनिक मूवी के राहुल-अंजलि, उनकी लव स्टोरी, उनका रोमांस-दोस्ती सब कुछ यूनिक था. 10 करोड़ के बजट में बनी इस मूवी ने 106 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी.
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