01:23 AM, 05-Mar-2026
ट्रंप की चेतावनी के बाद स्पेन ने अमेरिका के साथ सहयोग पर सहमति जताई
अमेरिका ने कहा है कि स्पेन अब मध्य पूर्व में चल रहे सैन्य अभियानों में अमेरिका के साथ सहयोग करने को तैयार हो गया है। यह फैसला तब सामने आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पेन को कड़ी चेतावनी दी थी। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि स्पेन ने ट्रंप का संदेश “स्पष्ट रूप से सुन लिया” है और अब वह अमेरिकी सेना के साथ समन्वय करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सेनाएं अब आपस में बातचीत कर रही हैं और आगे की रणनीति पर काम कर रही हैं।
दरअसल इससे पहले स्पेन के विदेश मंत्री जोसे मैनुअल अल्बारेस ने कहा था कि उनका देश अमेरिका को स्पेन में मौजूद संयुक्त सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ऐसे हमलों के लिए नहीं करने देगा जो संयुक्त राष्ट्र के नियमों के तहत नहीं आते। इस बयान के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर स्पेन सहयोग नहीं करता तो अमेरिका उसके साथ व्यापारिक संबंध खत्म कर सकता है। ट्रंप की इस चेतावनी के बाद दोनों देशों के बीच तेज बातचीत हुई। अब व्हाइट हाउस का कहना है कि स्पेन ने सहयोग करने का फैसला कर लिया है।
01:22 AM, 05-Mar-2026
इस्राइल ने दक्षिणी लेबनान के गांवों को खाली करने का आदेश दिया, हमले तेज
मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के बीच इस्राइल ने दक्षिणी लेबनान के कई गांवों के लोगों को तुरंत इलाका खाली करने का आदेश दिया है। इस्राइली सेना ने चेतावनी दी है कि सीमा के पास रहने वाले लोग तुरंत लितानी नदी के उत्तर की ओर चले जाएं, क्योंकि वहां बड़े सैन्य हमले हो सकते हैं। यह आदेश ऐसे समय आया है जब बेरूत के आसपास और दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में इस्राइल के हवाई हमले तेज हो गए हैं। लेबनान के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार हाल के हमलों में कम से कम 70 लोगों की मौत हो चुकी है और 400 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। हजारों लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों की ओर जा रहे हैं।
यह संघर्ष तब और बढ़ गया जब हिज्बुल्ला ने उत्तरी इस्राइल पर रॉकेट और ड्रोन से हमले किए। इसके जवाब में इस्राइल ने कई हवाई हमले किए और सीमा पर अतिरिक्त सैनिक भी भेज दिए। अभी यह साफ नहीं है कि इस्राइल दक्षिणी लेबनान में बड़े जमीनी हमले की तैयारी कर रहा है या नहीं। बेरूत के पास हाजमियेह इलाके में एक होटल पर भी मिसाइल हमला हुआ। वहां मौजूद लोगों ने बताया कि अचानक जोरदार धमाका हुआ और पूरा इलाका हिल गया। कई लोग घायल हो गए और आसपास की इमारतों को भी नुकसान पहुंचा।
01:20 AM, 05-Mar-2026
अमेरिका ने कहा- युद्ध के लिए हथियारों का भंडार मजबूत
अमेरिकी सेना ने कहा है कि ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान के लिए उसके पास पर्याप्त हथियार और गोला-बारूद मौजूद है। यह जानकारी अमेरिका के शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने दी। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिकी सेना की तैयारियां पूरी हैं और अभियान जारी रखने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया कि युद्ध की शुरुआत में अमेरिका ने ज्यादा उन्नत हथियारों का इस्तेमाल किया था। लेकिन अब जब अमेरिका ने ईरान के हवाई क्षेत्र पर नियंत्रण हासिल कर लिया है तो साधारण गुरुत्वाकर्षण बमों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि उन्नत हथियारों का भंडार अभी भी बेहद मजबूत स्थिति में है। यानी जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल फिर से किया जा सकता है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि सैन्य अभियान को इस तरह योजना बनाकर चलाया जा रहा है कि हथियारों की आपूर्ति प्रभावित न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो हथियारों और सैन्य संसाधनों का प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण होगा।
01:20 AM, 05-Mar-2026
तुर्किये की ओर बढ़ रही ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को नाटो ने रोका
तुर्किये के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि ईरान से छोड़ी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को नाटो की वायु रक्षा प्रणाली ने तुर्किये के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही रोक दिया। मंत्रालय के अनुसार मिसाइल पहले इराक और सीरिया के हवाई क्षेत्र से होकर गुजरी थी। जैसे ही यह तुर्किये की ओर बढ़ी, पूर्वी भूमध्यसागर में तैनात नाटो की मिसाइल रक्षा इकाइयों ने इसे इंटरसेप्ट कर लिया।
घटना के बाद तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। बातचीत के दौरान तुर्किये ने कहा कि ऐसे कदमों से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है और इससे बचना जरूरी है। नाटो के प्रवक्ता ने भी कहा कि संगठन अपने सभी सदस्य देशों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि मिसाइल को रोकने के लिए नाटो की कौन-सी प्रणाली का इस्तेमाल किया गया। तुर्किये में नाटो की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली का एक अहम हिस्सा तैनात है, जिसमें क्युरेजिक बेस पर लगा रडार भी शामिल है। यह रडार ईरान की दिशा से आने वाली मिसाइलों का पहले से पता लगाने में सक्षम माना जाता है।
01:19 AM, 05-Mar-2026
ईरान ने इराक से सीमा पर विपक्षी समूहों को रोकने को कहा
ईरान ने इराक से अपील की है कि वह अपने क्षेत्र में मौजूद ईरान विरोधी समूहों को सीमा पार करने से रोके। एक इराकी अधिकारी के अनुसार यह अनुरोध ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने फोन पर बातचीत के दौरान किया। बताया गया कि ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप सचिव अली बाघेरी ने इराक के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कासिम अल-अरजी से बात की। इस बातचीत में उन्होंने कहा कि इराक में मौजूद ईरान विरोधी संगठनों की गतिविधियों को नियंत्रित किया जाए।
ईरान का आरोप है कि ये विपक्षी समूह समय-समय पर उसकी सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश करते हैं और देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं। वर्तमान युद्ध की स्थिति में ईरान को आशंका है कि ऐसे समूह हालात का फायदा उठाकर अशांति फैला सकते हैं। इराक और ईरान के बीच लंबी सीमा है और दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग भी होता रहा है। लेकिन इराक के अंदर कई ऐसे राजनीतिक और सशस्त्र समूह मौजूद हैं जिनका ईरान से टकराव रहा है।
01:19 AM, 05-Mar-2026
इराक के प्रमुख शिया धर्मगुरु ने ईरान पर हमले की निंदा की
इराक के सबसे प्रभावशाली शिया धर्मगुरु ग्रैंड आयतुल्लाह अली अल-सिस्तानी ने ईरान पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र का सदस्य होने वाले किसी भी देश पर बिना संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी के हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। सिस्तानी ने कहा कि इस तरह के सैन्य हमले पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और अराजकता को बढ़ावा देते हैं। उनका मानना है कि यह युद्ध केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे मध्य पूर्व के देशों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर संघर्ष जारी रहा तो इससे लंबे समय तक अशांति बनी रह सकती है।
इराक के पवित्र शहर नजफ में रहने वाले सिस्तानी दुनिया के सबसे प्रभावशाली शिया धार्मिक नेताओं में से एक माने जाते हैं। उनके विचारों का असर केवल इराक ही नहीं बल्कि पूरे शिया समुदाय पर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध का सबसे बड़ा नुकसान आम लोगों को होता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जल्द से जल्द इस संघर्ष को रोकने के लिए पहल करनी चाहिए। सिस्तानी ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के रास्ते से समाधान निकालने की अपील की है।
01:09 AM, 05-Mar-2026
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अमेरिका को दी कड़ी चेतावनी
ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने अमेरिका को अब तक की सबसे कड़ी चेतावनी दी है। गार्ड ने कहा है कि अगर अमेरिका अपनी गतिविधियां जारी रखता है तो पूरे क्षेत्र के सैन्य और आर्थिक ढांचे को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा। यह बयान ईरानी सरकारी टेलीविजन के जरिए जारी किया गया। इसमें कहा गया कि अमेरिका पश्चिम एशिया में लगातार शरारत और धोखे की नीति अपना रहा है और इसका परिणाम उसे भुगतना पड़ेगा।
ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी सेना नागरिक ढांचों को अपने सैन्य अभियानों के लिए इस्तेमाल कर रही है। हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया। रिवोल्यूशनरी गार्ड ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य ताकतों में से एक मानी जाती है। इसका देश की रक्षा और क्षेत्रीय रणनीति में अहम रोल है।
01:06 AM, 05-Mar-2026
ईरान में युद्ध में मरने वालों की संख्या 1045 पहुंची
ईरान में अमेरिका और इस्राइल के साथ चल रहे युद्ध के बीच मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ईरान की सरकारी संस्था फाउंडेशन ऑफ मार्टियर्स एंड वेटरन्स अफेयर्सके अनुसार अब तक कम से कम 1045 लोगों की मौत हो चुकी है। संस्था ने बताया कि यह संख्या उन शवों की है जिनकी पहचान कर ली गई है और जिन्हें दफनाने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक भी हो सकती है क्योंकि कई इलाकों में अभी भी मलबा हटाने और खोज अभियान जारी है। पिछले कुछ दिनों में ईरान के कई शहरों पर हवाई हमले हुए हैं, जिनमें सैन्य ठिकानों के साथ-साथ कई रिहायशी इलाके भी प्रभावित हुए हैं। इन हमलों के कारण बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं और हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है।
युद्ध की वजह से देश के अस्पतालों पर भी भारी दबाव पड़ रहा है। कई अस्पतालों में घायल लोगों की संख्या इतनी ज्यादा है कि अतिरिक्त मेडिकल स्टाफ और संसाधनों की जरूरत पड़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा चला तो मानवीय संकट और भी गंभीर हो सकता है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी चिंता जताई है कि लगातार हो रहे हमलों के कारण आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। ईरान सरकार का कहना है कि वह देश की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रही है। वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संघर्ष को रोकने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहा है।
01:05 AM, 05-Mar-2026
ईरान में नए सर्वोच्च नेता के चयन की तैयारी तेज
ईरान में नए सर्वोच्च नेता के चयन की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। देश के वरिष्ठ धार्मिक नेता आयतुल्लाह अहमद खातमी ने कहा है कि नए नेता के चयन के लिए विकल्प अब लगभग तय हो चुके हैं और जल्द फैसला लिया जा सकता है। अहमद खातमी असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्सके सदस्य हैं। यह वही संस्था है जो ईरान में सर्वोच्च नेता का चुनाव करती है। उन्होंने सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित बयान में कहा कि नए नेता के लिए संभावित नामों पर काफी हद तक सहमति बन चुकी है।
ईरान में यह प्रक्रिया ऐसे समय में चल रही है जब देश अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे युद्ध के कारण बेहद तनावपूर्ण हालात से गुजर रहा है। हाल ही में हुए हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी, जिसके बाद देश की राजनीतिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सरकारी मीडिया के अनुसार खामेनेई के लिए आयोजित होने वाला शोक समारोह भी फिलहाल टाल दिया गया है। बताया गया है कि तेहरान पर लगातार हो रहे हमलों और सुरक्षा चिंताओं के कारण यह फैसला लिया गया है। समारोह बाद में आयोजित किया जाएगा। ईरान में सर्वोच्च नेता का पद बेहद शक्तिशाली माना जाता है। देश की सेना, न्याय व्यवस्था और कई प्रमुख संस्थाएं सीधे इसी पद के अधीन काम करती हैं। इसलिए नए नेता के चयन को लेकर देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि आने वाला फैसला ईरान की भविष्य की नीति और क्षेत्रीय राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।
01:05 AM, 05-Mar-2026
ईरान में 100 घंटे से इंटरनेट बंद
ईरान में चल रहे युद्ध के बीच देश में इंटरनेट सेवाएं लगभग पूरी तरह बंद हो गई हैं। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था नेटब्लॉक्स (NetBlocks)के अनुसार ईरान करीब 100 घंटे से इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना चल रहा है। संस्था का कहना है कि इस समय देश में इंटरनेट सामान्य स्तर के केवल 1 प्रतिशत पर ही काम कर रहा है, यानी ज्यादातर लोग ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि ईरानी अधिकारियों ने यह इंटरनेट ब्लैकआउट सुरक्षा कारणों से लगाया है। युद्ध की स्थिति में सरकारें अक्सर इंटरनेट बंद कर देती हैं ताकि जानकारी के प्रवाह को नियंत्रित किया जा सके और विरोध प्रदर्शनों को रोका जा सके। इस साल यह दूसरी बार है जब पूरे देश में इंटरनेट बंद किया गया है। इससे पहले जनवरी में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भी ऐसा ही ब्लैकआउट लगाया गया था।
नेटब्लॉक्स ने पहले के इंटरनेट शटडाउन का अनुमान लगाया था कि उससे ईरान की अर्थव्यवस्था को 3 करोड़ 70 लाख डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ था। इंटरनेट बंद होने से कारोबार, बैंकिंग, ऑनलाइन सेवाएं और संचार पूरी तरह प्रभावित हो जाते हैं। उधर फारस की खाड़ी में स्थित हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही भी लगभग 90 प्रतिशत तक कम हो गई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद अहम माना जाता है क्योंकि यहीं से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है।












