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Bollywood Blockbuster Movie : बॉलीवुड में फिल्मों में ब्रेक पाने के लिए कई बार एक्टर-एक्ट्रेस को बहुत संघर्ष करना पड़ता है तो कई बार घर बैठे ही फिल्म मिल जाती है. अमृता सिंह को बेताब फिल्म बिना किसी परिश्रम के मिली थी. धर्मेंद्र सिंह उनके घर दिल्ली पहुंचे थे और बेताब फिल्म के लिए साइन कर लिया था. यह बात 1983 की है. बॉलीवुड की एक और एक्ट्रेस के साथ ऐसा हुई कुछ हुआ था. फिल्ममेकर बीआर चोपड़ा संगीतकार नौशाद से मिलने उनके घर पर पहुंचे थे. संगीतकार नौशाद के घर पर बैठी खूबसूरत लेडी सिंगर को देखकर बीआर चोपड़ा ने उन्हें फिल्म में साइन कर लिया. फिल्म ने रिलीज होते ही इतिहास रचा लेकिन जीतेंद्र कंगाल हो गए थे. आइये जानते हैं दिलचस्प किस्सा….
24 सितंबर 1982 को एक फिल्म रिलीज हुई थी. नाम था निकाह. इस फिल्म में सलमा आगा, राज बब्बर और दीपक पराशर लीड रोल में नजर आए थे. सलमा आगा की यह पहली फिल्म थी. फिल्म की कहानी डॉ. अचला नागर ने लिखी थी. डायरेक्शन-प्रोडक्शन बीआर चोपड़ा ने किया था. म्यूजिक रवि का था. फिल्म में 39:31 मिनट की लेंग्थ के कुल 7 गाने रखे गए थे. फिल्म का एक गाना ‘दिल के अरमां आंसुओं में बह गए’ बहुत पॉप्युलर हुआ था. इस गाने को सलमा आगा ने अपनी आवाज दी थी. वो सिंगर बनने के लिए लंदन से मुंबई आई थीं. फिल्म को बैन करने की मांग कई मुस्लिम संगठनों ने की थी. मेकर्स और फिल्म के खिलाफ 34 केस दर्ज हुए थे. फिल्म ने रिलीज होते ही इतिहास रच दिया लेकिन सुपरस्टार जीतेंद्र को बहुत नुकसान हुआ था. वो लगभग कंगाल हो गए थे. आइये विस्तार से जानते हैं दिलचस्प किस्सा……..

सबसे पहले यह जान लेते हैं कि सलमा आगा को यह फिल्म कैसे मिली. एक्ट्रेस सलमा आगा सिंगर बनने के लिए मुंबई आई थीं. वो यहां पर संगीतकार नौशाद के घर पर बैठी हुई थीं. बीआर चोपड़ा ने मिलने पहुंचे थे. उन्होंने उसी समय सलमा को फिल्म में कास्ट करने का फैसला कर लिया. बीआर चोपड़ा ने उन्हें ट्रेनिंग दिलवाई. फिर निकाह फिल्म से लॉन्च किया. फिल्म का म्यूजिक रवि ने दिया था. धुंध के 9 साल बाद दोनों की साथ में यह दूसरी फिल्म थी. गुलाम अली ने इस फिल्म में एक गाना गाया था. डॉ. अचला नागर को इस फिल्म में पहली बार काम करने का मौका मिला था. म्यूजिक डायरेक्टर रवि ने सलमा आगा की आवाज पसंद नहीं आई थी. बीआर चोपड़ा ने उन्हें मनाया और धुन बदलने को कहा. ऐसा म्यूजिक तैयार करने को कहा जो सलमा आगा की आवाज के हिसाब से हो.

सलमा आगा को ‘निकाह’ फिल्म कैसे मिली, इसकी कहानी यह भी है कि सलमा की फैमिली बीआर चोपड़ा से लंदन में मिली थी. सलमा को कोई फिल्म में लेने का अनुरोध किया था. बीआर चोपड़ा ने उन्हें अपने भाई धरम चोपड़ा के पास इंडिया भेजा. धरम उन दिनों प्रोड्यूसर किशोर शर्मा की फिल्म ‘चाणक्य और चंद्रगुप्त’ डायरेक्ट कर रहे थे. उन्होंने सलमा आगा को किशोर शर्मा के ऑफिस में स्क्रीन टेस्ट देने के लिए भेज दिया. किशोर ने सलमा का स्क्रीन टेस्ट लिया और रिजेक्ट कर दिया. जब यह बात बीआर चोपड़ा को पता चली तो वो बहुत नाराज हुए. उन्होंने अपनी अगली फिल्म ‘निकाह’ के लिए सलमा को साइन कर लिया. और इस तरह से जीनत अमान इस फिल्म का हिस्सा नहीं बन पाईं.
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सलमा आगा को जमकर पब्लिसिटी मिली. राज बब्बर इस बात से खासे नाराज थे. उन्हें पोस्टर में बिल्कुल किनारे पर दिखाया गया था. उन्होंने बीआर चोपड़ा से अपनी नाराजगी जाहिर की थी. पहले फिल्म का नाम ‘तलाक-तलाक-तलाक’ रखा गया था लेकिन यह टाइटल दूसरे फिल्ममेकर के पास था. ऐसे में बीआर चोपड़ा ने टाइटल ‘निकाह’ कर दिया.

अमृता सिंह की मां रुखसाना सुल्तान ने बीआर चोपड़ा को उनकी बेटी को फिल्म में लेने के लिए बहुत फुसलाया था. चोपड़ा नए चेहरे की तलाश में थे. आखिरकार सलमा आगा को साइन किया. इस बात से नाराज होकर रुखसाना सुल्तान ने सलमा आगा को परेशान करना शुरू किया. धमकी भरे फोन कॉल्स किए, धमकी भरे खत लिखे. पत्रों में सलमा को लंदन वापस लौटने वर्ना गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी. बाद में खुलासा हुआ कि ये पत्र रुखसाना ने लिखे थे. हालांकि अमृता सिंह को तब तक बेताब फिल्म मिल चुकी थी.

‘निकाह’ फिल्म के निर्माण के दौरान बीआर चोपड़ा ने रामानंद सागर को सलमा आगा को अपनी फिल्म में लेने का सुझाव दिया. रामानंद सागर ने उन्हें ‘सलमा’ फिल्म के लिए साइन कर लिया. फिल्म के रिलीज होने के बाद सलमा आगा से बीआर चोपड़ा के रिश्ते बिगड़ गए. पूरा झगड़ा फिल्म के गाने को लेकर हुआ. बीआर चोपड़ा का कहना था कि ‘दिल के अरमा आंसुओं में बह गए’ के राइट्स उनके पास हैं. इस गाने को ‘सलमा’ फिल्म में लेने के लिए लिखित परमिशन लेनी होगी. सलमा आगा का कहना था कि गाने को उन्होंने आवाज दी है. ऐसे में यह उनका गाना है. बीआर चोपड़ा ने रामानंद सागर को सलमा आगा को फिल्म से निकालने के लिए कहा लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया.

बीआर चोपड़ा ने जब सलमा आगा को ‘निकाह’ के लिए साइन किया तो उनके रहने के लिए एक फ्लैट भी दिया था. उन्होंने सलमा से फिल्म के प्रीमियर के लिए कोलकाता चलने को कहा लेकिन सलमा ने इनकार कर दिया. उनकी मां लंदन में बीमार थीं. वो वहां जाना चाहती थीं पर बीआर चोपड़ा पर कोई फर्क नहीं पड़ा. उन्होंने सलमा से कहा कि अगर आप प्रीमियर में शामिल नहीं होंगी तो वह अपना फ्लैट खाली करवा लेंगे. सलमा का कहना था कि फ्लैट कोलकाता के एक डिस्ट्रीब्यूटर का था. उन्होंने भारी डिपॉजिट दिया था. हर माह किराया भी देती थीं. बीआर चोपड़ा ने इन आरोपों का खंडन किया था. झगड़े के चलते सलमा आगा को कई फिल्मों से हाथ धोना पड़ा.

‘निकाह’ का डायरेक्ट या इनडायरेक्ट कनेक्शन जीतेंद्र-ऋषि कपूर की फिल्म ‘दीदार-ए-यार’ से जुड़ा है. दीदार-ए-यार फिल्म 22 अक्टूबर 1982 को रिलीज हुई थी. इससे ठीक एक माह पहले 22 सितंबर 1982 को ‘निकाह’ रिलीज हुई थी. दोनों ही फिल्में इस्लामिक रीति-रिवाजों पर बेस्ड थीं. ‘दीदार-ए-यार’ को एचएस रवैल ने डायरेक्ट किया था जो कि राहुल रवैल के पिता थे. फिल्म को जीतेंद्र के भाई प्रसन्न कपूर ने प्रोड्यूस किया था. यह फिल्म बहुत लंबे समय से बन रही थी लेकिन कुछ ऐसा हुआ कि ‘निकाह’ के बाद ही रिलीज हो पाई. दीदार-ए-यार फिल्म के ‘निकाह’ के बाद रिलीज होने की कहानी और भी दिलचस्प है. राइटर उमर खय्याम सहारनपुरी ने 60 के दशक में एक कहानी ‘सलमा’ फिल्म के लिए लिखी थी. डायरेक्टर एचएस रवैल थे. फिल्म बन नहीं पाई. 1963 में उमर खय्याम सहारनपुरी ने अपनी कहानी राइटर एसोसिएशन में रजिस्टर्ड करा ली. इसी कहानी पर जीतेंद्र के भाई प्रसन्न कपूर ने फिल्म ‘दीदार-ए-यार’ बनानी शुरू की. कोई विवाद ना हो, इसलिए उन्होंने उमर खय्याम सहारनपुरी को पैसे देकर चुप करा लिया. दीदार-ए-यार को कंप्लीट होने में कई साल लगे.

जब फिल्म कंप्लीट होने वाली थी तो उमर खय्याम सहारनपुरी ने राइटर्स एसोसिएशन में शिकायत कर दी. एसोसिएशन ने प्रसन्न कपूर से फिल्म की शूटिंग रोकने और उमर खय्याम सहारनपुरी को पैसे देने की बात कही. प्रसन्न कपूर ने पूरी असलियत बताई. दरअसल, बीआर चोपड़ा उन दिनों ‘निकाह’ फिल्म बना रहे थे. वो नहीं चाहते थे कि जीतेंद्र की फिल्म ‘दीदार-ए-यार’ रिलीज हो. उमर खय्याम सहारनपुरी और राइटर्स एसोसिएशन के मेंबर सतीश भटनागर दोनों बीआर चोपड़ा के कर्मचारी थे. दोनों ने बीआर चोपड़ा के कहने पर ही पूरा खेल रचा था. निकाह ‘दीदार-ए-यार’ से पहले रिलीज हो गई और ब्लॉकबस्टर रही, वहीं ‘दीदार-ए-यार’ फ्लॉप हो गई थी. जीतेंद्र ने अपने जीवन की पूरी कमाई फिल्म में लगा दी थी. फिल्म फ्लॉप हो जाने से वो सड़क पर आ गए.
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