डॉक्टरों का कहना है कि अगर बच्चे में लंबे समय तक गुस्सा, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, पढ़ाई में गिरावट या व्यवहार में अचानक बदलाव दिखे, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय रहते मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेने से बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है।
स्क्रीन टाइम बढ़ने से आंखें तो रो रही हैं, दिमाग भी होने लगा है बीमार
– फोटो : adobe stock
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