माघ मेला क्षेत्र में सनातन धर्म से प्रभावित होकर इटली से आईं लूक्रेसिया श्रद्धालुओं के आकर्षण और चर्चा का केंद्र बनी हैं। गुरु ज्ञान मिलने के बाद से वह प्रयाग को तीर्थराज और गंगा को मां बुलाती हैं। खुद के बारे में कुछ पूछने वालों से जयश्री राम का जयकारा लगाते हुए कहती हैं कि गंगा मइया की जय। उनका पहनावा तो विदेशी है लेकिन भाव भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत दिखे। हाथ जोड़कर वह प्रणाम बोलती हैं और संगम की रेत को स्वर्ग (हैवेन )करार देती हैं।
लूक्रेसिया इटली से अकेली नहीं अपने पिता आंजलो संग माघ मेला क्षेत्र आई हैं। हिंदी में बात करने में कुछ असहज थीं लेकिन टूटीफूटी हिंदी में उन्होंने कहा कि यहां धरती का स्वर्ग है। गुरुजी की सानिध्य में शांति मिलती हैं। यहां कैसे आईं, गुरुजी से कैसे मिलीं, इस बारे में भी उन्होंने सारा कुछ बताया लेकिन उनके गुरु नैमिषारण्य में मढि़या घाट मैगलगंज के नागा बाबा मनमौजी राम पुरी ने विस्तृत जानकारी दी कि वह कैसे उनके संपर्क में आईं और उनकी शिष्या बनीं।
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