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Bollywood Movies with Same Story Line : बॉलीवुड में ऐसा कई बार होता है कि कोई स्क्रिप्ट बार-बार रिजेक्ट होती है. कोई भी प्रोड्यूसर उस पर पैसे लगाने के लिए तैयार नहीं होता. बाद में इसी रिजेक्टेड स्क्रिप्ट पर जब फिल्म बनती है तो हर कोई हैरान मूवी की कामयाबी देखकर हैरान रह जाता है. 70 के दशक में एक ऐसी फिल्म आई थी जिसकी स्क्रिप्ट उस समय के हर बड़े फिल्म निर्माता के पास पहुंची थी. फिल्म ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था. इस फिल्म में कई विलेन एक साथ काम कर रहे थे. एक मूवी में विलेन पहली बार हीरो बनकर पर्दे पर आया था. यह फिल्म कौनसी थी, आइये जानते हैं दिलचस्प फैक्ट्स……..
70 का दशक कई बॉलीवुड सितारों की जिंदगी में नई रोशनी लेकर आया. देवानंद और राजेश खन्ना का स्टारडम जहां 1975 के बाद ढलान पर आ गया, वहीं अमिताभ बच्चन-विनोद खन्ना जैसे नए बॉलीवुड सुपरस्टार तेजी से उभरे. अमिताभ पूरे दशक छाए रहे. वहीं, करियर की शुरुआत में निगेटिव रोल्स से सुर्खियां बटोरने वाले शत्रुघ्न सिन्हा इसी दशक में हीरो बन गए. 1976 की एक फिल्म ने शत्रुघ्न सिन्हा की तकदीर हमेशा के लिए बदल दी. 1976 में एक ऐसी फिल्म आईं जो रिजेक्टेड स्क्रिप्ट पर बनाई गई थी. ये फिल्में थी : कालीचरण. आगे चलकर इसी फिल्म की कहानी पर दो और फिल्में बनाई गईं. इसमें से एक फिल्म फ्लॉप रही, दूसरी ब्लॉकबस्टर रही. आइये जानते हैं तीनों फिल्मों से जुड़े दिलचस्प किस्से…..

सबसे पहले बात करते हैं 7 फरवरी 1976 को रिलीज हुई फिल्म ‘कालीचरण’ की. इस फिल्म में शत्रुघ्न सिन्हा, रीना रॉय, प्रेमनाथ, अजीत, मदन पुरी और डैनी डेंजोंगप्पा लीड रोल में थे. यह एक एक्शन थ्रिलर फिल्म थी जिसका डायरेक्शन सुभाष घई ने किया था. फिल्म की स्टोरी सुभाष घई, भरत बी. भल्ला ने लिखी थी. स्क्रीनप्ले राम केलकर ने लिखा था. डायलॉग जैनेंद्र जैन ने लिखे थे. प्रोड्यूसर एन.एन. सिप्पी थे. सुभाष घई के डायरेक्शन में बनी यह पहली फिल्म थी. पुणे FTII से डिप्लोमा करने के बाद सुभाष घई फिल्मों में हीरो बनने के लिए मुंबई आए थे. 24 जनवरी 1945 को जन्मे घई का बचपन नाना-नानी के घर में नागपुर में बीता.<br />तकदीर, उमंग, आराधना जैसी फिल्मों में बतौर एक्टर काम किया लेकिन मन नहीं लगा. वो स्क्रिप्ट राइटिंग में हाथ आजमाने लगे. उनका काम चल निकला. इसी दौरान उन्होंने ‘कालीचरण’ की स्क्रिप्ट लिखी. यह स्क्रिप्ट उन्होंने अपने मित्र शत्रुघ्न सिन्हा के लिए ही लिखी थी.

प्रकाश मेहरा-यश चोपड़ा जैसे कई प्रोड्यूसर को कहानी सुनाई लेकिन कोई इस पर फिल्म बनाने के लिए तैयार नहीं हुआ. फिर प्रोड्यूसर एनएन सिप्पी ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया. एनएन सिप्पी को रिजेक्टेड स्क्रिप्ट पसंद आई. कहानी सुनाते समय सुभाष घई डायलॉग और एक्टिंग भी किया करते थे. एनएन सिप्पी ने चार दिन बाद फिर से स्क्रिप्ट सुनी और घई से कहा कि आपको फिल्म का डायरेक्शन भी करना होगा. घई ने इससे पहले कभी कोई कैमरा-एडिटिंग नहीं देखी थी. इस फिल्म में राजेश खन्ना को लीड रोल के तौर पर लिया जाना था.
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सुभाष घई ने शत्रुघ्न के नाम की सिफारिश की. वो तब निगेटिव रोल्स करते थे. शत्रुघ्न सिन्हा को कहानी सुनाने जब पहुंचे तो रात के 3 बज चुके थे. वो कहानी सुनते समय सो गए थे. शत्रुघ्न सिन्हा इस फिल्म को छोड़ने वाले थे लेकिन प्रोड्यूसर एनएन सिप्पी ने उन्हें मार्केट प्राइस दी, तब जाकर वो इसके लिए तैयार हुए. इस फिल्म ने शत्रुघ्न सिन्हा को बतौर हीरो फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित कर दिया. डीएसपी प्रभाकर का रोल अमर हो गया.

कालीचरण में म्यूजिक कल्याण जी – आनंद जी ने दिया था. म्यूजिक सुपरहिट रहा. फिल्म का एक गाना ‘जा रे जा ओ हरजाई’ आज भी उतना ही पॉप्युलर है. गीतकार इंदरजीत सिंह तुलसी और रविंद्र जैन थे. इस फिल्म से ही शत्रुघ्न सिन्हा और रीना रॉय के बीच अफेयर की चर्चा शुरू हुई. सुभाष घई को फिल्म के दौरान बहुत मुश्किलें आईं. कहा जाता है कि शत्रुघ्न सिन्हा मेकअप रूप में रीना रॉय के साथ घंटों घुसे रहते थे और बाहर नहीं आते थे. सुभाष शत्रुघ्न सिन्हा की गर्लफ्रेंड पूनम के मुंहबोले भाई थे. पूनम उन्हें राखी बांधा करती थीं. जब प्रोड्यूसर एनएन सिप्पी ने फिल्म की रॉ कॉपी देखी तो बहुत निराश हुए लेकिन जब फाइनल प्रिंट देखा तो समझ गए कि फिल्म बहुत बड़ी हिट होगी.यह फिल्म अजीत के आइकॉनिक डायलॉग ‘सारा शहर मुझे लॉयन के नाम से जानता है’ के लिए जानी जाती है. घई अजीत से मिलने उनके घर पर पहुंचे थे. तब वो न्यू कमर थे, फिर भी अजीत ने उन्हें ब्रेकफास्ट पर बुलाया. कहानी सुनी और ‘लॉयन’ के रोल के लिए हामी भर दी.

यह एकमात्र फिल्म है जिसमें रविंद्र जैन ने सुभाष घई के साथ बतौर गीतकार काम किया. कल्याण जी आनंद जी ने भी पहली बार घई के साथ पहली बार काम किया था. फिल्म का सबसे फेवरेट सॉन्ग ‘जा रे ओ जा हरजाई’ बाद में 1999 की मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म ‘दादा’ में कॉपी किया गया था. इसी ट्यून से मिलता-जुलता सॉन्ग ‘तुण तुण ओ यारा तुण तुण, सुण सुण ओ यारा सुण सुण’ बनाया गया. 1992 की पाकिस्तानी फिल्म ‘महबूबा’ में ‘जा रे जा ओ हरजाई’ की सेम ट्यून पर एक गाना ‘जा रे ओ दीवाने’ बनाया गया था. फिरोज खान की फिल्म ‘धर्मात्मा’ से घई बहुत प्रभावित थे, इसलिए कालीचरण का बैकग्राउंड म्यूजिक, टाइटल म्यूजिक उन्होंने बिल्कुल मिलता-जुलता ही रखा था.

कालीचरण फिल्म की कहानी पर 1992 में हमशक्ल फिल्म बनाई गई. इसमें विनोद खन्ना-मीनाक्षी शेषाद्रि और शम्मी कपूर लीड रोल में थे. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. फिल्म को कल्पतरु ने डायरेक्ट किया था. स्टोरी केबी पाठक ने लिखी थी. स्क्रीनप्ले केबी पाठक और विनोद खन्ना ने मिलकर लिखा था. प्रोड्यूसर रूप कादर थे. यह फिल्म 31 जुलाई 1992 को रिलीज हुई थी और फ्लॉप साबित हुई थी. फिल्म की शूटिंग के दौरान विनोद खन्ना ने मीनाक्षी के होंठ चूम लिए थे. इससे वह नाराज हो गई थीं और तीन दिन शूटिंग नहीं की थी. विनोद खन्ना की यह लास्ट फिल्म थी जिसमें वह डबल रोल में थे. इस फिल्म को कालीचरन का रीमेके माना जाता है. यह फिल्म 1987 में शुरू हुई थी. डायरेक्टर कल्पतरू और विनोद खन्ना की साथ में यह चौथी फिल्म थी. इससे पहले दोनों ने धमकी, खून का बदला खून, राज महल में काम किया था.

कालीचरण फिल्म से मिलती-जुलती कहानी पर 2012 में अक्षय कुमार की फिल्म ‘राउडी राठौर’ बनाई गई थी. हालांकि यह मूवी तेलुगू फिल्म का रीमेक थी लेकिन इसकी कहानी कालीचरण (1976), हमशक्ल (1992) और इंस्पेक्टर धनुष (1991 ) से मिलती-जुलती थी. अक्षय कुमार का फिल्म में डबल रोल था. अक्षय कुमार की यह पहली हिट फिल्म थी जिसमें वह डबल रोल में थे. सोनाक्षी सिन्हा की यह दूसरी फिल्म थी. करीना कपूर भी फिल्म के एक गाने ‘चिंता ता ता चिता चिता’ में नजर आई थीं. सोनाक्षी सिन्हा की प्रभुदेवा के साथ यह पहली फिल्म थी. अक्षय कुमार ने पहली बार सोनाक्षी सिन्हा के साथ काम किया था.

राउडी राठौर 1 जून 2012 को रिलीज हुई थी. डायरेक्टर प्रभुदेवा थे. प्रोड्यूसर रॉनी स्क्रूवाला और संजय लीला भंसाली थे. संजय लीला भंसाली पहली बार किसी एक्शन फिल्म के सह-निर्माता थे. फिल्म में अक्षय कुमार-सोनाक्षी सिन्हा, एम. नसीर और यशपाल शर्मा लीड रोल में थे. 77 करोड़ के बजट में बनी यह फिल्म 2800 स्क्रीन पर रिलीज की गई थी. फिल्म ने 180 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी. राउडी राठौर अक्षय कुमार के करियर की सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाली फिल्मों में शुमार है. अक्षय कुमार मूंछों में नजर आए थे. अक्षय ने इस फिल्म के रोल के लिए स्पेशल कराटे सीखे थे. उनके बेटे को एक्शन रोल पसंद थे, इसलिए अक्षय ने यह किरदार स्वीकार किया था. कुमार सानू ने इस फिल्म में एक गाना ‘छम्मक छल्लो छैल छबीली’ सॉन्ग गाकर फिर से मेनस्ट्रीम में वापसी की थी. अक्षय ने भी लंबे समय बाद एक्शन फिल्म में वापसी की थी.
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