मेरठ के कपसाड़ गांव में अनुसूचित जाति की महिला सुनीता की हत्या कर बेटी रूबी का अपहरण करने के मामले में जेल में आरोपी पारस सोम की रविवार को पहली रात बीती। सोमवार सुबह वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा से पारस ने खुद के नाबालिग होने की बात कहकर मदद की गुहार लगाई। इस पर अधीक्षक ने कहा कि इसमें जेल प्रशासन कोई मदद नहीं कर सकता है। इसके लिए अपने वकील के माध्यम से कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी बंदी को कहां रखा जाएगा, यह कोर्ट तय करती है। यह कानूनी पहलू है। सोमवार को कोई भी पारस से मिलने के लिए जेल में नहीं पहुंचा। यदि कोई आता है तो नियम अनुसार मिलाई कराई जाएगी।
इससे पहले रविवार शाम रूबी के कोर्ट में बयान दर्ज हुए और इसके बाद पारस को ड्यूटी जज सावन कुमार के सामने पेश कर 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। पारस को पहले दस दिन मुलाहिजा बैरक में रखा जाएगा। इसमें फिलहाल 67 बंदी हैं।
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रूबी
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बताया गया है कि पारस जेल में दाखिल हुआ तो गुमसुम था। जेल के बंदी खाना खा चुके थे इसलिए जो बचा हुआ खाना था वही पारस को दिया गया। सोमवार सुबह सात बजे नंबरदार ने बैरक में पहुंचकर पारस को जगाया। सुबह हर बंदी की तरह नाश्ते में गुड़, रोटी और चाय का नाश्ता दिया गया। दोपहर को लंच में मूली की सब्जी, अरहर की दाल और रोटी दी गई।
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रूबी और आरोपी पारस सोम का फाइल फोटो
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह है मामला
कपसाड़ गांव में बृहस्पतिवार सुबह अनुसूचित जाति की महिला सुनीता बेटी रूबी के साथ गन्ने की छिलाई करने के लिए जा रही थी। रजबहे पर गांव के ही आरोपी पारस सोम ने रूबी का अपहरण कर लिया था। विरोध करने पर उसकी मां सुनीता की फरसे से सिर पर वार कर हत्या कर दी थी।
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आरोपी पारस सोम को पुलिस ने स्पेशल सीजेएम की कोर्ट में पेश किया। इस दौरान लोगों की लगी भीड़
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पीड़ित परिवार अनुसूचित जाति से है। इस वारदात ने इलाके में तनाव फैला दिया था। पुलिस की लगातार दबिश के बाद शनिवार देर शाम पारस को रुड़की रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया और युवती को सकुशल तलाश लिया गया था।