Magh Mela 2026 Mauni Amavasya Snan: माघ स्नान न केवल शरीर को शुद्ध करता है, बल्कि मन और आत्मा को भी पवित्र करता है. प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में मकर संक्रांति के बाद तीसरा माघ स्नान मौनी अमावस्या पर 18 फरवरी 2026 को किया जाएगा. ये माघ मेले का सबसे पवित्र स्नान माना जाता है. ऐसे में पुण्य प्राप्ति के लिए मौनी अमावस्या को क्या करें जान लें.
मौनी अमावस्या स्नान मुहूर्त – सुबह 5.27 – सुबह 7.15 (सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का महत्व)
मौनी अमावस्या पर माघ स्नान का महत्व
अमावस्या तिथि पर्व मानी गई है, खासकर माघ माह में आने वाली मौनी अमावस्या का दिन जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति पाने का दिन है. इस दिन मौन रहकर स्नान, ध्यान और तप करने की परंपरा है. मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर किया गया संगम स्नान राजसूय यज्ञ के समान फल देता है और समस्त सुख प्रदान करता है.
मौनी अमावस्या पर क्या करें
- इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ स्थान या पवित्र नदियों में स्नान करें.
- शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इस दिन किया गया स्नान और दान मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करता है
- पूरे दिन मौन व्रत रखने का संकल्प लें. इससे आत्मा की शुद्धि और मानसिक तनाव दूर होता है.
- दोपहर में सोएं नहीं, गायत्री मंत्र या अपने ईष्ट देव के मंत्रों का जाप करें.
- सुबह पीपल की 108 परिक्रमा करें इससे दरिद्रता मिटती है.
- जरुरतमंदों को दान में कंबल, तिल, गुड़, घी, अनाज दें साथ ही सुहागिनों को सुहाग की सामग्री बांटें.
घर में ये उपाय कर पाएं माघ मेले में स्नान का पुण्य
- मौनी अमावस्या के दिन माघ मेले में स्नान करने नहीं जा पा रहे हैं तो इस दिन घर में ही नहाने के पानी में तिल और गंगाजल डालें और फिर गंगा जी के मंत्र का जाप करते हुए स्नान करें.
- घर पर ही काले तिल और जल से पितरों का तर्पण करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें. इसके लिए एक तांबे के पात्र में जल और दूध मिला लें, इसमें काले तिल भी डालें. अब हाथ में तिल मिला जल लेकर अपने पितरों का नाम लेते हुए पात्र में छोड़े. ऐसा तीन बार करें.
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