पीतलनगरी के हस्तशिल्प कारीगरों के हुनर को दुनियाभर में औद्योगिक पहचान दिलाने के उद्देश्य से 18 साल पहले (2007) दिल्ली रोड पर करीब 78 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया वातानुकूलित तीन मंजिला सोर्सिंग हब अब खंडहर हो चुका है।
लिफ्ट और स्वचालित सीढ़ियों की सुविधा वाले इस सोर्सिंग हब से मंडल भर के बड़े कारोबारियों के साथ-साथ हजारों कारीगरों के सपने भी जुड़े थे, लेकिन वाह रे एमडीए…कारीगरों और उद्यमियों के इस स्वप्न महल को आबाद होने से पहले ही वीरान कर दिया।
पीतलनगरी का हस्तशिल्प किसी परिचय का मोहताज नहीं है। यहां तैयार होने वाली पीतल व अन्य धातुओं की वस्तुएं कई देशों को निर्यात भी होती हैं। इन उत्पादों को और बड़े बाजार तक पहुंचाने के लिए वर्ष 2007 में 12 हजार वर्ग मीटर भूमि पर शीश महलनुमा विशाल भवन तैयार कराया गया।
इसका नाम सोर्सिंग हब रखने के पीछे उद्देश्य था कि मंडल के कारोबार का सोर्स बनने वाली इमारत। इसमें हस्तशिल्प और पीतल उत्पादों का प्रदर्शन, विपणन केंद्र, भंडारण और परिवहन केंद्र (वेयरहाउस), डिजाइन प्रदर्शन और बिक्री का केंद्र विकसित होना था।











