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कपूर परिवार का विवाद कई मोर्चों पर कानूनी पेचीदगियों में उलझा हुआ है. जहां एक ओर संपत्ति और वसीयत की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है, वहीं दूसरी ओर मानहानि के केस ने पारिवारिक कलह को पब्लिक के सामने ला दिया है.
नई दिल्ली: दिवंगत बिजनेसमैन संजय कपूर की विरासत को लेकर शुरू हुआ पारिवारिक विवाद अब अदालती गलियारों में और भी गहरा गया है. संजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर ने अपनी ननद मंधिरा कपूर और एक अन्य सहयोगी के विरुद्ध आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया है. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रिया कपूर ने ‘इन-कैमरा’ (बंद कमरे में) पेश होकर अपना आधिकारिक बयान दर्ज कराया है.
डिजिटल प्लेटफॉर्म और ‘मीडिया ट्रायल’ का आरोप
प्रिया कपूर का मुख्य आरोप है कि उनके खिलाफ एक सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है. शिकायत के अनुसार, मंधिरा कपूर ने विभिन्न डिजिटल माध्यमों, पॉडकास्ट और प्रेस इंटरव्यू का सहारा लेकर प्रिया की छवि को सार्वजनिक रूप से धूमिल किया है. प्रिया का तर्क है कि उनके निजी जीवन पर किए गए ये हमले और झूठे बयान मानहानि की श्रेणी में आते हैं. उन्होंने इसे न्यायिक प्रक्रिया के इतर एक ‘मीडिया ट्रायल’ करार दिया है, जिसका उद्देश्य उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना और समाज में उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना है.
फर्जी वसीयत और संपत्ति की जंग
इस पूरे कानूनी टकराव के मूल में संजय कपूर की विशाल संपत्ति है. संजय कपूर के निधन के उपरांत उनकी दूसरी पत्नी, बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर के बच्चों—समायरा और कियान—ने प्रिया कपूर के विरुद्ध मोर्चा खोल रखा है. बच्चों का आरोप है कि प्रिया ने कोर्ट में एक फर्जी वसीयत पेश की है ताकि उन्हें उनके कानूनी हक और पैतृक संपत्ति से बेदखल किया जा सके. संपत्ति को लेकर यह खींचतान अब गंभीर कानूनी आरोपों में तब्दील हो चुकी है.
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची कानूनी लड़ाई
यह विवाद न केवल निचली अदालतों, बल्कि देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) तक भी पहुंच गया है. प्रिया कपूर ने साल 2016 में संजय कपूर और करिश्मा कपूर के बीच हुए तलाक के गोपनीय दस्तावेजों और समझौते (Settlement) की प्रतियों की मांग की है. इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 16 जनवरी को अभिनेत्री करिश्मा कपूर को नोटिस जारी किया है. न्यायालय ने करिश्मा को दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. यह देखना दिलचस्प होगा कि इन गोपनीय दस्तावेजों का इस संपत्ति विवाद और मानहानि के मामले पर क्या प्रभाव पड़ता है.
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