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विवेक रंजन अग्निहोत्री ने ‘द बंगाल फाइल्स’ के साथ अपनी द फाइल्स ट्रायोलॉजी खत्म की. डायरेक्टर ने ऐलान किया कि अब वो नई तरह की फिल्मों के साथ पर्दे पर लौटने को तैयार हैं. वो कहते हैं कि अब उन्होंने प्रेरणादायक सिनेमा और युवा टैलेंट की मेंटरिंग पर फोकस करने का फैसला किया है. विवेक ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी भी बनाई है.
नई दिल्ली. फिल्म निर्माता-निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री की साल 2025 में रिलीज हुई फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ ने बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था. ‘द ताशकंद फाइल्स’, ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘द बंगाल फाइल्स’ के जरिए अपनी चर्चित ट्रायोलॉजी पूरी करने के बाद अब विवेक अग्निहोत्री नए और अलग विषयों की ओर कदम बढ़ाने की तैयारी में हैं.
हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने संकेत दिया कि ट्रायोलॉजी के बाद वह प्रेरणादायक और सकारात्मक सिनेमा पर फोकस करेंगे, जो लोगों को राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे. उन्होंने बताया कि अब वह ऐसी कहानियों पर काम करना चाहते हैं, जिनके केंद्र में देश और समाज होगा. इस साल उनका फोकस तीन बातों पर है—नई प्रेरणादायक फिल्में, लेखन और युवा टैलेंट की मेंटरिंग.
‘द बंगाल फाइल्स’ के बाद विवेक ने दो महीने का ब्रेक लिया था
आईएएनएस से खास बातचीत में विवेक रंजन अग्निहोत्री ने बताया कि ‘द बंगाल फाइल्स’ की रिलीज के बाद वह करीब दो महीने अपनी पत्नी के साथ बाहर रहे. इस दौरान उन्होंने खुद को, समाज, राष्ट्र और सिनेमा को लेकर गहराई से आत्ममंथन किया. उन्होंने कहा, ‘अब मैं नए विचार और एनर्जी के साथ फिल्में बनाना चाहता हूं. साल 2012 में मैंने इस ट्रायोलॉजी की घोषणा की थी. डायरेक्टर ने काफी संघर्ष और त्याग के बाद इसे पूरा किया. इनमें से दो फिल्में सुपरहिट और ब्लॉकबस्टर रहीं, जबकि ‘द बंगाल फाइल्स’ का असर ऐसा है कि आने वाले वर्षों तक इसकी चर्चा होती रहेगी. अब मैं ऐसी कहानियों पर काम करना चाहता हूं, जो लोगों को यह एहसास कराएं कि राष्ट्र की जिम्मेदारी उन्हें खुद संभालनी होगी.’
नई तरह की फिल्में बनाएंगे मेकर
उन्होंने आगे कहा कि आज के समय का सच क्या है, उससे कैसे जूझा जाए और नए जोश व उम्मीद के साथ भारत के भविष्य का निर्माण कैसे किया जाए—यही सवाल अब उनकी फिल्मों के केंद्र में होंगे. उन्होंने कहा, ‘बहुत समय तक हमने देश का वर्तमान और भविष्य सिर्फ सरकारों और राजनेताओं पर छोड़ दिया. जैसे स्वतंत्रता संग्राम में हुआ था, वैसे ही अब युवाओं को आगे आकर नेतृत्व संभालना होगा’.
सोशल मीडिया को लेकर विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि वह साल 2008 से इस पर सक्रिय रहे और जागरूकता फैलाने का काम किया, लेकिन अब सोशल मीडिया पूरी तरह पैसे और नकारात्मकता से जुड़ चुका है. उन्होंने आरोप लगाया कि यहां गाली-गलौज, नफरत, मनमुटाव और मानसिक हिंसा बढ़ गई है, वहीं महिलाओं और गरीबों के प्रति सम्मान भी कम होता जा रहा है. इसी वजह से उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाकर लंबे लेख और अकादमिक महत्व वाले कंटेंट पर ध्यान देना शुरू किया है. वह सबस्टैक और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं.
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प्रांजुल सिंह 3.5 साल से न्यूज18 हिंदी से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने Manorama School Of Communication (MASCOM) से जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा किया है. वो 2.5 साल से एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रही है…और पढ़ें
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