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फिल्म ‘शोले’ का आइकॉनिक गाना ‘जब तक है जान’ मई की तपती गर्मी में शूट किया गया था. डायरेक्टर रमेश सिप्पी की जिद के चलते हेमा मालिनी को नंगे पांव जलते पत्थरों पर नाचना पड़ा. शूटिंग के दौरान उन्हें असहनीय दर्द सहना पड़ा, जिसे देखकर हेमा मालिनी की मां बेहद परेशान थीं. मां ने पैरों की सुरक्षा के लिए सोल पहनने की सलाह दी, लेकिन डायरेक्टर ने सीन की खूबसूरती के लिए इसे हटवा दिया.
एक मैगजीन कवर लॉन्च इवेंट के दौरान एक बातचीत में हेमा मालिनी ने इस मशहूर गाने की शूटिंग से जुड़े एक्सपीरियंस को शेयर किया. उन्होंने बताया कि मई की भीषण गर्मी में नंगे पांव जलते पत्थरों पर नाचना उनके करियर के सबसे कठिन पलों में से एक था. बेटी हेमा को दर्द में देखकर उनकी में परेशान थीं.
बेटी को दर्द में देख जब मां दिया सुझाव
ड्रीम गर्ल ने बताया, ‘रेत, कीचड़ और खासकर पत्थर इतने गर्म थे कि नंगे पांव चलना भी बहुत दर्दनाक था. मां ने सुझाव दिया कि मैं पांव के नीचे पतली सोल लगा लूं ताकि दर्द कम हो.’ लेकिन यह समाधान ज्यादा देर नहीं चला. निर्देशक रमेश सिप्पी ने तुरंत नोटिस कर दिया और कहा कि डांस मूवमेंट्स में यह दिख जाएगा, जो स्क्रीन पर अच्छा नहीं लगेगा. हेमा ने कहा, रमेश जी ने तुरंत इसे हटाने को कहा.’
मई की भीषण गर्मी में शूट हुआ गाना
हेमा मालिनी ने यह भी बताया कि उन्होंने रमेश सिप्पी को मनाने की पूरी कोशिश की कि गाना नवंबर या दिसंबर में शूट किया जाए. लेकिन वह नहीं माने. वह बताती हैं- ‘मैंने कहा कि मई में बहुत गर्मी होगी, दिसंबर में बेहतर डांस कर पाऊंगी. लेकिन वे बहुत सख्त थे और मई में ही शूट करने पर अड़े रहे.’ शूट के बाद दर्द इतना था कि हेमा अपने पैरों को ठंडे पानी में डालतीं और ठंडे तौलिए से लपेटतीं. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि मेरे भरतनाट्यम के सालों की प्रैक्टिस ने मेरे पैरों और टांगों को इतनी ताकत दी कि मैं सह सकी.’
इस गाने के लिए हेमा ने नहीं थी कोई रिहर्सल
एक दिलचस्प फैक्ट यह है कि हेमा मालिनी ने इस गाने के लिए कोई रिहर्सल भी नहीं की थी, क्योंकि यह ज्यादा से ज्यादा एक्टिंग वाला सीन था. दर्द के बावजूद हेमा ने शूट पूरा किया. यह सीन शोले का सबसे यादगार हिस्सा बन गया, जहां बसंती (हेमा मालिनी) ‘जब तक है जान, मैं नाचूंगी. कहकर धर्मेंद्र को बचाने के लिए नाचती हैं.
फिल्म ‘शोले’ के रोचक फैक्ट्स
- शोले 1975 में रिलीज हुई और इसे रमेश सिप्पी ने डायरेक्ट किया था, जबकि कहानी सलीम–जावेद ने लिखी थी.
- यह फिल्म भारत की पहली बड़ी मल्टी-स्टार कास्ट फिल्मों में गिनी जाती है, जिसमें धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, जया बच्चन और अमजद खान थे.
- गब्बर सिंह का किरदार (अमजद खान) हिंदी सिनेमा का सबसे आइकॉनिक विलेन माना जाता है.
- फिल्म की शूटिंग ज्यादातर कर्नाटक के रामनगर इलाके में हुई थी.
- रिलीज के समय फिल्म को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली, लेकिन बाद में यह ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर बनी.
- शोले का ओरिजिनल एंडिंग अलग था, जिसमें ठाकुर गब्बर को मार देता है, लेकिन सेंसर के चलते बदली गई.
- यह भारत की पहली फिल्मों में से एक थी जिसे 70mm फॉर्मेट में रिलीज किया गया.
- आज भी शोले को भारतीय सिनेमा की सबसे महान फिल्मों में गिना जाता है.
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