करीब 15 साल पुराने अमरोहा के चर्चित काफूरपुर आंदोलन में बुधवार को मुरादाबाद की एक अदालत ने फैसला सुनाया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अमरोहा जिले के नौगावां सादात विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक समरपाल सिंह समेत आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। सुनवाई के दौरान 12 आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है। अमरोहा जिले के काफूरपुर रेलवे स्टेशन पर जाट समुदायों के लोगों ने आंदोलन किया था।
इस मामले में जीआरपी के गजरौला थाने में 11 मार्च 2011 को तत्कालीन स्टेशन अधीक्षक सरदार सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा था कि पांच मार्च 2011 को सुबह करीब दस बजे काफूरपुर स्टेशन के सामने जाट समुदाय के आरक्षण को लेकर आदर्श जूनियर हाई स्कूल के मैदान में अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति द्वारा धरना प्रदर्शन किया गया था।
जिसमें करीब दो से तीन हजार लोग एकत्र हुए थे। यह लोग नारेबाजी करते हुए रेलवे ट्रैक पर आ गए और वहां से हटाने का प्रयास किया तो पथराव करने की धमकी दी। इसके बाद रेलवे लाइन पर अपने जानवर लाकर बांध दिए थे। करीब 27 दिन चले आंदोलन से रेल संचालन बाधित हो गया था। रिपोर्ट में 50 नामजद और सैकड़ों अज्ञात को आरोपी बनाया गया था।
जीआरपी ने 50 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। इस मामले की सुनवाई मुरादाबाद में एमपी-एमएलए स्पेशल सेशन कोर्ट (अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या-01) एमपी सिंह की अदालत में चल रही थी। बुधवार को अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाया।
अदालत ने अमरोहा के नौगावां सादात विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक समर पाल सिंह, यशपाल मलिक, पूर्व सीओ उमेद सिंह, विजयपाल सिंह, डॉ. धीरेंद्र, धांदू, राहुल, भगत सिंह, अंकदीप, विजेंद्र सिंह, हरपाल सिंह, दिवाकर सिंह, नरेंद्र सिंह, बाबू जाटव, हरपाल सिंह, करन सिंह अमीन, अरविंद्र सिंह, मुकेश चौधरी, जसवंत सिंह, जागन सिंह,शीशपाल, कविता चौधरी, मनवीर सिंह चिकारा, मेघराज सिंह को बरी कर दिया।
इसके अलावा तेजेंद्र सिंह, प्रकाश सिंह, अरुण सिरोही, मेहर सिंह उर्फ मन्नू, विजयपाल सिंह, सत्यपाल चौधरी, गुड्डू उर्फ धर्मेंद्र, रविंद्र, प्रदीप चौधरी, नानक सिंह, शैलेंद्र सीनू, राजू, झुंडा और अशोक को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। दोषयुक्त हुए सभी लोगों ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा विश्वास था। उन्हें न्यायालय से न्याय मिला है।











