सोनभद्र/एबीएन न्यूज। विश्व आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर आज 02 फरवरी 2026 को जिला विकास अधिकारी सभागार, सोनभद्र में एक दिवसीय कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों एवं कृषि विभाग के अधिकारियों को आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल एवं उन्नत कृषि तकनीकों से अवगत कराना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला कृषि अधिकारी श्री कमलेश कुमार सिंह उपस्थित रहे। उनके साथ सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक (सहकारिता) श्री देवेंद्र कुमार सिंह, अपर जिला सहकारी अधिकारी श्री अवधेश सिंह, इफको मुख्यालय से क्षेत्रीय प्रबंधक (ग्रुप लीडर) श्री अक्षय कुमार पाण्डेय, इफको एमसी के टीएमई श्री धर्मेंद्र कुमार, इफको क्षेत्राधिकारी सोनभद्र श्री अभिजीत मौर्य, इफको एसएफए सोनभद्र, एमडीई एक्वाएग्री, इफको एमसी के एमडीए तथा जनपद के सभी विकास खंडों से कृषि विभाग के एडीओ (कृषि) एवं अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में कई प्रगतिशील किसानों ने भी सक्रिय सहभागिता की।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान नैनो यूरिया, नैनो डीएपी एवं इफको के अन्य उन्नत उत्पादों की उपयोग विधि, उनके लाभ तथा फसल उत्पादन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी गई। इफको प्रयागराज के क्षेत्रीय प्रबंधक श्री अक्षय कुमार पाण्डेय ने बताया कि नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी कम मात्रा में अधिक प्रभावी सिद्ध होते हैं, जिससे किसानों की लागत घटती है और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है। उन्होंने इसे टिकाऊ खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
इसी क्रम में इफको क्षेत्राधिकारी श्री अभिजीत मौर्य ने सागरिका एवं एनपीके कंसोर्टिया के बारे में जानकारी देते हुए इसके जैविक लाभों एवं मृदा स्वास्थ्य सुधार में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक (सहकारिता) ने कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के साथ सहकारी व्यवस्था की उपयोगिता पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के दौरान इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र, सोनभद्र में स्थापित प्रदर्शन प्रक्षेत्र का भी निरीक्षण किया गया। समापन अवसर पर नैनो यूरिया से संतुष्ट एवं लाभान्वित किसानों को सम्मानित किया गया। साथ ही मुख्य अतिथि सहित सभी वरिष्ठ अधिकारियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के समापन पर जिला कृषि अधिकारी ने आशा व्यक्त की कि यह प्रशिक्षण किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा और इससे जनपद में उन्नत, लागत प्रभावी एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि को बढ़ावा मिलेगा।
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