सोनभद्र/एबीएन न्यूज़। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश) एवं एनटीपीसी सिंगरौली, सोनभद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय सम्भागीय नाट्य समारोह 2025–26 का आयोजन 02 फरवरी से 05 फरवरी 2026 तक सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस रंगमंचीय महोत्सव ने क्षेत्र में सांस्कृतिक चेतना, रचनात्मक संवाद और कला के प्रति रुचि को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
समारोह के अंतिम दिन 05 फरवरी 2026 को वरिष्ठ नाटककार अलखनन्दन द्वारा रचित चर्चित नाटक ‘चंदा बेड़नी’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। नाटक का संवेदनशील रूपांतरण श्री विजय बहादुर श्रीवास्तव द्वारा किया गया, जबकि निर्देशन की जिम्मेदारी श्री नीरज कुशवाहा ने कुशलतापूर्वक निभाई। इस नाट्य प्रस्तुति का मंचन रसरंग फाउंडेशन, कानपुर द्वारा किया गया।
कर्मचारी विकास केंद्र, एनटीपीसी सिंगरौली में प्रस्तुत इस नाटक ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से गहराई तक प्रभावित किया। सशक्त अभिनय, सटीक मंच-सज्जा और प्रभावी निर्देशन के माध्यम से सामाजिक यथार्थ को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिसे दर्शकों ने देर तक तालियों के साथ सराहा।

इस अवसर पर वनिता समाज की अध्यक्षा श्रीमती प्रज्ञा नायक, महाप्रबंधक (प्रचालन एवं अनुरक्षण) श्री सी. एच. किशोर कुमार, महाप्रबंधक (प्रोजेक्ट) श्री रश्मी रंजन मोहंती, विभिन्न विभागों के प्रमुख, वनिता समाज की वरिष्ठ सदस्याएं, यूनियन एवं एसोसिएशन के प्रतिनिधि, ग्राम प्रधान, प्राचार्यगण, पत्रकार बंधु तथा बड़ी संख्या में रंगमंच प्रेमी उपस्थित रहे।
समापन अवसर पर अपने संबोधन में महाप्रबंधक श्री सी. एच. किशोर कुमार ने कहा कि यह चार दिवसीय नाट्य समारोह कला, संस्कृति और संवेदना का अनुपम संगम रहा। उन्होंने कहा कि प्रस्तुत नाट्य कृतियों ने मनोरंजन के साथ-साथ समाज, जीवन और मानवीय मूल्यों पर गहन चिंतन का अवसर प्रदान किया। उन्होंने कलाकारों की साधना, समर्पण और अनुशासन की सराहना करते हुए रसरंग फाउंडेशन, कानपुर की भूमिका को विशेष रूप से प्रशंसनीय बताया।

उन्होंने आगे कहा कि ‘चंदा बेड़नी’ जैसे नाटक प्रेम, विश्वास, करुणा और संवेदनशीलता का संदेश देते हैं और यह सिद्ध करते हैं कि कला का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानव चेतना को जागृत करना भी है।
चार दिवसीय इस सम्भागीय नाट्य समारोह का मुख्य उद्देश्य रंगमंच के माध्यम से सांस्कृतिक मूल्यों का संवर्धन, रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहन और क्षेत्रीय कलाकारों को मंच प्रदान करना रहा। यह आयोजन दर्शकों और कलाकारों दोनों के लिए एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बनकर सामने आया।
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